जलूद में देश के पहले जन-भागीदारी आधारित 60 मेगावाट सोलर प्लांट का लोकार्पण, सीएम डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की उपलब्धि को सराहा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को खरगोन जिले के जलूद में 271 करोड़ रुपये की लागत से नवनिर्मित 60 मेगावाट क्षमता के सोलर पॉवर प्लांट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पीपीपी (PPP) मोड और ग्रीन बॉन्ड के माध्यम से जनता को भागीदार बनाकर तैयार किया गया यह देश का पहला सौर ऊर्जा संयंत्र है। उन्होंने इस परियोजना को मध्यप्रदेश के साथ-साथ पूरे देश के लिए एक बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि बताया, जिससे मुख्य रूप से इंदौर नगर निगम को बिजली आपूर्ति में सीधा लाभ प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संयंत्र के आर्थिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ग्रीन बॉन्ड स्कीम के तहत आम नागरिक भी इस परियोजना का हिस्सा बन सकते हैं। इसमें कोई भी व्यक्ति 10 लाख रुपये तक के बॉन्ड खरीद सकता है, जिस पर लगभग 8 प्रतिशत वार्षिक बचत का लाभ 20 वर्षों तक मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निवेश न केवल सुरक्षित है बल्कि जरूरत पड़ने पर इसे बेचा भी जा सकता है। मुख्यमंत्री ने गर्व व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश आज दिल्ली मेट्रो जैसी सेवाओं को भी सस्ती बिजली उपलब्ध करा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इस संयंत्र की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी आएगी। उन्होंने बताया कि अगले 10 वर्षों में परियोजना की लागत निकल आएगी और उसके बाद अगले 10 साल यह केवल मुनाफे का माध्यम रहेगी। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित ‘वैदिक घड़ी’ के अवलोकन का उल्लेख करते हुए सीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में प्राचीन खगोलीय ज्ञान पर आधारित ऐसी घड़ियाँ स्थापित कर रही है।
समारोह को संबोधित करते हुए इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि जलूद से ही नर्मदा जल 70 किलोमीटर दूर इंदौर पहुंचता है। उन्होंने बताया कि इंदौर नगर निगम देश का पहला नगरीय निकाय है जिसने ग्रीन बॉन्ड से फंड जुटाकर इस संयंत्र का सपना साकार किया है। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी और स्थानीय विधायकों सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। अंत में मुख्यमंत्री ने महेश्वर क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व और नारी सशक्तिकरण के उदाहरण के रूप में देवी अहिल्याबाई होल्कर और मंडन मिश्र के योगदान का भी स्मरण किया।



