बंगाल चुनाव: दूसरे चरण में भारी मतदान से बना नया कीर्तिमान, चुनाव आयोग ने जनता को दी बधाई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मतदाताओं ने अपने ही पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। बुधवार सुबह 7 बजे शुरू हुई मतदान प्रक्रिया के अंत में शाम पौने आठ बजे तक कुल 91.66 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। निर्वाचन सदन के अनुसार, आजादी के बाद बंगाल के विधानसभा चुनावों में यह भागीदारी का सबसे उच्चतम स्तर है। पहले चरण के 93.19 प्रतिशत मतदान के साथ मिलकर अब दोनों चरणों का औसत 92.47 फीसदी हो गया है, जो राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चर्चा का विषय है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए मतदाताओं को बधाई दी है। निर्वाचन सदन में स्थापित कंट्रोल रूम से आयोग की उच्च स्तरीय टीम, जिसमें आयुक्त डॉ. एसएस संधू और डॉ. विवेक जोशी शामिल थे, ने सीधे वेबकास्टिंग के जरिए हर बूथ की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी। आयोग ने स्पष्ट किया कि अभी कई हजार केंद्रों का अंतिम डेटा आना शेष है, जिससे प्रतिशत में और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।
मतदाताओं की संख्या बल की बात करें तो पहले चरण में 3.60 करोड़ के मुकाबले दूसरे चरण में 3.21 करोड़ लोगों ने वोटिंग की। इसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 1.65 करोड़ और महिला मतदाताओं की संख्या 1.57 करोड़ रही। विशेष रूप से महिलाओं का मतदान प्रतिशत (92.8%) पुरुषों (91.07%) की तुलना में अधिक रहा, जो राज्य में महिला मतदाताओं की बढ़ती जागरूकता और सक्रियता को दर्शाता है।
पश्चिम बंगाल का चुनावी सफर 1951 के महज 43.12 प्रतिशत से शुरू होकर आज 90 प्रतिशत के पार जा चुका है। 1960 और 70 के दशक में मतदान का स्तर औसतन 55 से 65 प्रतिशत के बीच रहा था। 1980 के दशक के बाद इसमें तेजी आई, जब 1984 के लोकसभा चुनाव में यह 78.61 फीसदी पहुंचा। 2011 में जब सत्ता परिवर्तन हुआ था, तब 84.72 प्रतिशत मतदान हुआ था, लेकिन मौजूदा चुनाव के शुरुआती दो चरणों ने उस ऐतिहासिक आंकड़े को भी बहुत पीछे छोड़ दिया है।
निर्वाचन आयोग के मुताबिक, यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। पिछले एक दशक के आंकड़ों पर गौर करें तो 2014 लोकसभा में 82.22%, 2019 में 81.76% और 2024 के आम चुनाव में 79.55% मतदान हुआ था। इसकी तुलना में वर्तमान विधानसभा चुनाव के रुझान अब तक के सबसे प्रभावी और ऐतिहासिक साबित हो रहे हैं।



