भीषण गर्मी की आशंका के बीच केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का आश्वासन, घबराने के बजाय सावधानी बरतने की सलाह

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मई महीने में संभावित भीषण गर्मी और लू को लेकर आम नागरिकों को आश्वस्त किया है। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग की चेतावनियों से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सटीक पूर्वानुमानों को समझकर और आवश्यक सतर्कता बरतकर इसके प्रतिकूल प्रभावों को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है। मंत्री ने जनता से अपील की कि वे लू (हीटवेव) की भविष्यवाणियों पर अनावश्यक प्रतिक्रिया देने से बचें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि तापमान की स्थिति देश के सभी हिस्सों में एक समान नहीं रहेगी। जहां एक ओर दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत, पूर्वोत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ इलाकों में अधिकतम पारा सामान्य से ऊपर रह सकता है, वहीं देश के कई ऐसे हिस्से भी होंगे जहां तापमान सामान्य या उससे कम दर्ज किया जाएगा। विशेष रूप से ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र और हिमालय की तलहटी वाले क्षेत्रों में लू का असर सामान्य से 2-4 दिन अधिक रहने की संभावना जताई गई है।

मई महीने के साप्ताहिक विश्लेषण को साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि 8 से 14 मई और 22 से 28 मई के बीच उत्तर-पश्चिम, मध्य और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में गर्मी का प्रकोप बढ़ सकता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि 1 से 7 मई और 15 से 21 मई के दौरान पश्चिमी विक्षोभ और संभावित वर्षा के कारण तापमान में गिरावट देखी जा सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रात के तापमान में वृद्धि होने से विशेषकर शहरी और तटीय क्षेत्रों में उमस भरी गर्मी का अनुभव हो सकता है।

सरकार की तैयारियों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रशासन गर्मी से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। पेयजल की सुचारू उपलब्धता, सार्वजनिक स्थानों पर शीतलन व्यवस्था और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य और जिला प्रशासन के बीच निरंतर समन्वय बनाया जा रहा है। उन्होंने संवेदनशील समूहों जैसे बुजुर्गों, बच्चों और श्रमिकों के स्वास्थ्य के प्रति विशेष ध्यान देने तथा पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और धूप के सीधे संपर्क से बचने की अपील की।

किसानों के लिए विशेष परामर्श जारी करते हुए मंत्री ने सुझाव दिया कि कृषि कार्य सुबह या शाम के ठंडे समय में ही किए जाएं। उन्होंने सिंचाई प्रबंधन और पशुओं के बचाव पर जोर देते हुए बताया कि उत्तर भारत में रबी फसलों की देर से कटाई के लिए वर्तमान स्थितियां अनुकूल हैं, हालांकि कुछ क्षेत्रों में ग्रीष्मकालीन फसलों पर गर्मी का दबाव देखा जा सकता है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए आईएमडी की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर उपलब्ध दैनिक अपडेट्स का नियमित पालन करें।

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