डेयरी क्षेत्र में निवेश और नवाचार से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालकों को मिलेगी 10 लाख तक की सब्सिडी: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर में राज्य स्तरीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पशुपालन क्षेत्र केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वावलंबन की रीढ़ है। सरकार डेयरी सेक्टर में निवेश बढ़ाकर रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन को मिशन मोड पर अपनाया जा रहा है। कार्यक्रम में पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग की ‘वृंदावन ग्राम’ थीम पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया गया, जिसमें विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रदर्शित किया गया था।

मुख्यमंत्री ने पशुपालकों के लिए बड़ी रियायतों की घोषणा करते हुए कहा कि मात्र 25 गायों की गौशाला खोलने वाले पशुपालकों को भी सरकार 10 लाख रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी प्रदान कर रही है। इसके साथ ही, निराश्रित पशुओं के लिए गौशालाओं के निर्माण पर अनुदान और बीमार पशुओं के त्वरित उपचार हेतु ‘गौ-एंबुलेंस’ सेवा का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने किसानों को यह भी भरोसा दिलाया कि यदि विकास कार्यों के लिए उनकी भूमि अधिग्रहित की जाती है, तो उन्हें चार गुना अधिक मुआवजा दिया जाएगा।

पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने इस अवसर पर बताया कि प्रदेश में दूध के संग्रहण को 12 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 50 लाख लीटर प्रतिदिन करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में 1300 नई गौशालाएं बनी हैं, जहाँ 5 लाख से अधिक गौवंश का पालन हो रहा है। सम्मेलन में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में पशुपालक उपस्थित रहे।

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