ग्वालियर बनेगा शिक्षा का नया केंद्र: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया ऋषि गालव विश्वविद्यालय का भूमिपूजन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर में ऋषि गालव विश्वविद्यालय का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ग्वालियर प्राचीन काल से ही वीरता, कला और विद्वता का शिखर रहा है और अब इस विश्वविद्यालय की स्थापना से यह शहर प्रदेश के ‘एजुकेशन हब’ के रूप में एक नई पहचान स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ऋषि गालव के नाम पर बनने वाला यह संस्थान भविष्य की पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति, संस्कारों और आधुनिक कौशल से लैस कर देश का अग्रदूत बनाएगा।
मुख्यमंत्री ने मध्य भारत शिक्षा समिति के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संस्थापक श्रद्धेय सदाशिव गणेश गोखले ने 1941 में पराधीनता के दौर में शिक्षा की जो अलख जगाई थी, वह आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुकी है। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत प्रदेश सरकार विद्यार्थियों की योग्यता, दक्षता और चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि अब विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को ‘कुलगुरु’ के सम्मानजनक संबोधन से नवाजा गया है और दीक्षांत समारोहों में काले कोट की जगह भारतीय वेशभूषा व साफे की परंपरा शुरू की गई है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्री सुरेश सोनी ने कहा कि वास्तविक विकास वही है जिसमें मनुष्य का सर्वांगीण विकास हो। उन्होंने तकनीकी निर्भरता और एआई (AI) के युग में बौद्धिक कौशल बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उच्च शिक्षा मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय परंपरा में शिक्षा का दायित्व सदैव समाज पर रहा है और यह विश्वविद्यालय उसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएगा। समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र बांदिल ने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ आधुनिक स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं होंगी और कक्षाएं 18 जुलाई 2027 से शुरू करने का लक्ष्य है।



