पीएम मोदी के कोयला गैसीकरण प्रोत्साहन योजना के फैसले का मुख्यमंत्री ने किया स्वागत, 50 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 37,500 करोड़ रुपये की योजना का स्वागत किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस निर्णय से देश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास को नई गति प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री ने इस योजना के आर्थिक पहलुओं पर जोर देते हुए बताया कि देशभर में प्रस्तावित 25 परियोजनाओं के सफल संचालन से 50 हजार नए रोजगार सृजित होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि गैसीकरण तकनीक में निवेश से दीर्घकालिक औद्योगिक विकास का ढांचा तैयार होगा, जिससे आने वाले समय में ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे।

केंद्रीय कैबिनेट के इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने से भारत यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे रसायनों के आयात पर अपनी भारी निर्भरता को कम कर सकेगा। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक कदम है।

एक महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार के अंतर्गत, कोयला उत्पादक कंपनियों और उपभोक्ता संयंत्रों के बीच होने वाले ‘कोयला लिंकेज’ समझौते की समय-सीमा को अब 30 साल के लिए बढ़ा दिया गया है। कोयले को सिंथेटिक गैस में बदलने वाले उद्योगों के लिए यह निर्णय काफी प्रभावी साबित होगा, क्योंकि इससे उन्हें कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति का भरोसा मिलेगा।

सांख्यिकीय दृष्टि से भारत में कोयले के 401 अरब टन और लिग्नाइट के 47 अरब टन के विशाल भंडार मौजूद हैं। देश की आधी से अधिक ऊर्जा आपूर्ति आज भी कोयले पर आधारित है। गैसीकरण की प्रक्रिया से इस ठोस ईंधन को गैस के रूप में परिवर्तित कर विभिन्न रसायनों और घरेलू ईंधन के उत्पादन हेतु उपयोग में लाया जा सकेगा, जो पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए लाभकारी है।

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