ब्रिक्स सम्मेलन: प्रधानमंत्री मोदी ने सदस्य देशों के मंत्रियों के साथ साझा किया भारत का विजन, जयशंकर ने शांति और समुद्री सुरक्षा पर दिया कड़ा संदेश

भारत की मेजबानी में हो रहे ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सभी सदस्य और भागीदार देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की। सेवा तीर्थ में हुई इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने प्रतिनिधियों के साथ संक्षिप्त चर्चा की। इस कूटनीतिक आयोजन के केंद्र में भारत मंडपम है, जहाँ विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सम्मेलन की कमान संभालते हुए दुनिया भर से आए अपने समकक्षों का स्वागत किया। आज शाम मेजबान देश की ओर से मेहमानों के लिए विशेष भोज का भी प्रबंध किया गया है।
सम्मेलन की औपचारिक चर्चाओं के दौरान भारत ने वैश्विक मुद्दों पर अपना रुख कड़ा रखा। विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि वैश्विक संघर्षों के दौर में कूटनीति ही एकमात्र समाधान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सतत विकास की राह पर आगे बढ़ने के लिए ‘साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों’ के सिद्धांत को अपनाना होगा। उन्होंने सदस्य देशों को आगाह किया कि समुद्री रास्तों में आने वाली बाधाएं वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए घातक सिद्ध हो सकती हैं, इसलिए निर्बाध समुद्री प्रवाह सुनिश्चित करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
आतंकवाद और तकनीकी बदलावों पर चर्चा करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि नई तकनीक का उपयोग समावेशी विकास के लिए होना चाहिए, न कि विनाश के लिए। बैठक में उपस्थित प्रमुख नेताओं में रूस के सर्गेई लावरोव, इंडोनेशिया के सुगिओनो, मलेशिया के मोहम्मद बिन हाजी हसन और यूएई के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार शामिल थे। ईरान के विदेश मंत्री की उपस्थिति को भी इस बैठक में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह बैठक प्रधानमंत्री मोदी के जन-केंद्रित दृष्टिकोण और ‘मानवता प्रथम’ के नारे को चरितार्थ करती है। सम्मेलन के आगामी सत्रों में ब्रिक्स के 20 वर्षों के सफर की समीक्षा की जाएगी। शुक्रवार को होने वाले विशेष सत्र ‘ब्रिक्स एट 20’ में इस बात पर विचार होगा कि कैसे अंतरराष्ट्रीय प्रणालियों और वैश्विक शासन में सुधार कर उन्हें अधिक प्रभावी और न्यायसंगत बनाया जा सकता है।



