थोक महंगाई ने तोड़ा 42 महीनों का रिकॉर्ड, अप्रैल में उछलकर 8.30% के स्तर पर पहुंची

देश में महंगाई के मोर्चे पर आम जनता और अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा 14 मई को जारी रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल महीने में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर दोगुनी से भी अधिक बढ़कर 8.30% पर पहुंच गई है। मार्च में यह आंकड़ा महज 3.88% था। उल्लेखनीय है कि यह पिछले 42 महीनों का उच्चतम स्तर है; इससे पहले अक्टूबर 2022 में थोक महंगाई 8.39% दर्ज की गई थी।
वाणिज्य मंत्रालय के विश्लेषण के मुताबिक, महंगाई में इस अप्रत्याशित वृद्धि का मुख्य कारण दैनिक उपभोग की वस्तुओं और ईंधन की कीमतों में हुआ इजाफा है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने आग में घी डालने का काम किया है। इस तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबे समय तक बना रहा, तो आने वाले दिनों में महंगाई और भी आक्रामक रुख अपना सकती है।
आंकड़ों के विस्तृत विवरण से पता चलता है कि ईंधन और बिजली (Fuel and Power) की थोक महंगाई दर में सबसे भारी उछाल आया है, जो 1.05% से सीधे 24.71% पर जा पहुंची है। इसी तरह, प्राथमिक वस्तुओं (Primary Articles) की महंगाई दर 6.36% से बढ़कर 9.17% हो गई है। विनिर्मित उत्पादों (Manufactured Products) की बात करें तो यहाँ दर 3.39% से बढ़कर 4.62% रही, जबकि खाद्य सूचकांक (Food Index) में भी मामूली बढ़त देखी गई और यह 1.85% से बढ़कर 1.98% पर पहुंच गया।
गौरतलब है कि थोक महंगाई के ढांचे में सबसे बड़ा हिस्सा ‘मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स’ का होता है, जिसका वेटेज 64.23% है। इसके बाद ‘प्राइमरी आर्टिकल्स’ (22.62%) और ‘फ्यूल एंड पावर’ (13.15%) आते हैं। प्राइमरी आर्टिकल्स के अंतर्गत अनाज, सब्जियां, तिलहन, खनिज और क्रूड पेट्रोलियम जैसी अनिवार्य वस्तुएं शामिल होती हैं।
वहीं दूसरी ओर, खुदरा महंगाई (Retail Inflation) के मोर्चे पर भी थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई 3.48% रही, जो मार्च में 3.40% थी। खुदरा स्तर पर महंगाई बढ़ने का प्रमुख कारण खाद्य मुद्रास्फीति है, जो मार्च के 3.87% से बढ़कर अप्रैल में 4.20% के स्तर पर पहुंच गई है।



