पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दाम बढ़े: वैश्विक संकट के चलते तेल कंपनियों ने बढ़ाई कीमतें, दिल्ली में पेट्रोल ₹97.77 पार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई निरंतर तेजी के कारण भारतीय तेल कंपनियों ने शुक्रवार से पेट्रोल और डीजल की दरों में वृद्धि कर दी है। नई दरों के लागू होने के बाद दिल्ली में अब एक लीटर पेट्रोल के लिए ₹97.77 (₹3.14 की वृद्धि) और डीजल के लिए ₹90.67 (₹3.11 की वृद्धि) चुकाने होंगे। तेल विपणन कंपनियों ने बढ़ती लागत और घाटे को कम करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है।
सीएनजी उपभोक्ताओं को भी इस बढ़ती महंगाई से राहत नहीं मिली है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण गैस आपूर्ति पर पड़े असर के चलते सीएनजी की कीमतों में ₹2 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है। इस बदलाव के साथ दिल्ली में सीएनजी अब ₹79.09 प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध होगी। उत्पाद शुल्क, वैट और डीलर कमीशन जैसे अन्य कर जुड़ने के बाद आम उपभोक्ताओं पर इसका बोझ और अधिक बढ़ जाता है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां इस समय गहरे संकट से गुजर रही हैं। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, यदि कीमतों में यह बदलाव नहीं किया जाता तो कंपनियों का कुल घाटा एक ही तिमाही में ₹1 लाख करोड़ से अधिक हो सकता था। वर्तमान में कच्चे तेल की औसत कीमत $100 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुकी है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
आर्थिक मोर्चे पर रुपये की गिरती कीमत ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ₹95 के ऐतिहासिक निचले स्तर को पार कर चुका है, जिसका सीधा प्रभाव आयात बिल पर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इस संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए देश से अपील की थी कि विदेशी मुद्रा भंडार को संरक्षित करने के लिए ईंधन और अन्य विलासिता की वस्तुओं के उपभोग में विवेकशीलता बरतें।
वैश्विक बाजार की मौजूदा अनिश्चितता को देखते हुए भविष्य में भी ईंधन की कीमतों में स्थिरता की उम्मीद कम है। चूंकि परिवहन लागत बढ़ने से अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम भी प्रभावित होते हैं, इसलिए ईंधन की इन नई दरों का असर व्यापक आर्थिक परिदृश्य पर पड़ना तय है। तेल कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि वे अंतरराष्ट्रीय स्थितियों पर कड़ी नजर रख रही हैं।



