आरटीई द्वितीय चरण की लॉटरी समाप्त, 11 हजार से अधिक बच्चों को निजी स्कूलों में मिला मुफ्त प्रवेश
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत दूसरे चरण की ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया बुधवार को सफलतापूर्वक पूरी हो गई, जिसके अंतर्गत 11,485 बच्चों को उनकी पसंद के निजी स्कूलों में निशुल्क दाखिला आवंटित किया गया है। 20 मई को आयोजित इस कंप्यूटरीकृत लॉटरी में उन आवेदकों को प्राथमिकता दी गई, जिन्हें पहले चरण में कोई सीट नहीं मिल सकी थी। राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने ऑनलाइन बटन दबाकर इस आवंटन प्रक्रिया की शुरुआत की।
इस चरण के तहत विभिन्न स्तरों पर सीटों का आवंटन किया गया है, जिसमें नर्सरी कक्षा के लिए 7,599 बच्चों, केजी-1 के लिए 2,747 बच्चों और कक्षा पहली के लिए 1,139 बच्चों का चयन हुआ है। इस मौके पर संचालक हरजिंदर सिंह ने सफल छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उनके बेहतर कल की कामना की। इसके साथ ही उन्होंने इस पूरी व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग तथा मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की तकनीकी टीम के प्रयासों को सराहा।
चालू शैक्षणिक सत्र 2026-27 के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल आरटीई के तहत आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद कुल 1,80,875 छात्र योग्य पाए गए थे। इनमें से पहले दौर में 1.06 लाख से ज्यादा बच्चों को स्कूल आवंटित किए गए थे, जिनमें से 97,052 बच्चे पहले ही दाखिला ले चुके हैं। अब दूसरे चरण के 11,485 नए आवंटनों को मिलाकर इस साल मुफ्त शिक्षा का लाभ पाने वाले कुल विद्यार्थियों की संख्या 1,17,400 से अधिक हो गई है।
अभिभावक अपने बच्चों का आवंटन पत्र आरटीई की आधिकारिक वेबसाइट (www.rteportal.mp.gov.in) पर जाकर प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त चयनित अभ्यर्थियों को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस के जरिए भी इसकी जानकारी भेजी जा रही है। आवंटित विद्यालयों में प्रवेश लेने की अवधि 20 मई से 10 जून 2026 तक निर्धारित की गई है। नियमानुसार इन छात्रों की शिक्षण फीस सीधे सरकार द्वारा संबंधित स्कूलों के बैंक खातों में ऑनलाइन भेज दी जाएगी।
इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यक्रम के दौरान राज्य शिक्षा केंद्र की आरटीई नियंत्रक किरण कुशवाह और प्रशासक डॉ. राकेश दुबे उपस्थित रहे। उनके साथ ही तकनीकी सहयोगी संस्था मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रतिनिधि नितिन तुरकर और राम यादव सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी वहां मौजूद थे।



