अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस पर भोपाल में जुटे नीति-निर्माता: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने दी पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा

भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) में शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस 2026 के अवसर पर एक उच्चस्तरीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की, जिसमें केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। आयोजन का मुख्य उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण, विशेषकर ‘प्रोजेक्ट चीता’ की सफलताओं और भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना था। इस दौरान राज्य के पर्यावरण मंत्री दिलीप अहिरवार भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के समृद्ध प्राकृतिक पर्यावरण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश को देश के भीतर विभिन्न श्रेणियों जैसे ‘टाइगर, लेपर्ड, चीता, वल्चर, घड़ियाल और वुल्फ स्टेट’ के रूप में विशिष्ट पहचान हासिल है। उन्होंने कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर अभयारण्य में चीतों के सफल पुनर्वास को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। वर्तमान में प्रदेश में चीतों की संख्या 53 तक पहुंच चुकी है, जो वैश्विक वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक अद्वितीय वैज्ञानिक मॉडल है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने वन्यजीवों की अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण का ब्यौरा देते हुए कहा कि कूनो नदी में 33 दुर्लभ कछुए और 53 घड़ियाल छोड़े गए हैं। साथ ही, लगभग एक शताब्दी के लंबे अंतराल के बाद असम सरकार के सहयोग से 8 जंगली भैंसों को कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में पुनर्स्थापित किया गया है। राज्य की समृद्ध वानस्पतिक संपदा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यहाँ 5 हजार से अधिक वनस्पतियां, 500 पक्षी प्रजातियां, 180 से अधिक मछलियों की प्रजातियां और 100 से अधिक हाथी जंगलों में स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं।
पर्यावरण प्रबंधन को आधुनिक और जन-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रचार सामग्रियों का विमोचन किया गया। मुख्यमंत्री और केंद्रीय वन मंत्री द्वारा ‘एबीएस एंड-टू-एंड’ वेब पोर्टल को लॉन्च किया गया, जो पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का माध्यम बनेगा। इसी मंच से भारत की बायोडायवर्सिटी रिपोर्ट-2026, चीता संरक्षण ब्रोशर और 5 रुपये मूल्य का विशेष डाक टिकट (माय स्टैम्प) भी जारी किया गया। वन क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए आईआईएफएम में ‘डेटा ड्रिवन लैब’ का उद्घाटन किया गया। इसके अतिरिक्त, हुडको लिमिटेड के सहयोग से प्राप्त वन्यजीव बचाव वाहनों और 20 नई बाइकों को क्षेत्रीय वन अमले के उपयोग के लिए रवाना किया गया।
राज्य सरकार द्वारा जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए चलाए जा रहे ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की सफलता साझा करते हुए डॉ. यादव ने बताया कि 3000 करोड़ रुपये के बजट वाले इस तीन महीने के अभियान के अंतर्गत अब तक राज्य के 18 लाख लोगों ने श्रमदान किया है। इसके तहत 56 हजार से अधिक जल संरचनाओं, जिनमें 1200 तालाब, 827 बावडियां और 212 नदियां शामिल हैं, का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। उन्होंने भविष्य की वन्यजीव योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य में अब किंग कोबरा और गैंडों को लाने के प्रयास शुरू किए जा रहे हैं, तथा घायलों वन्यजीवों के त्वरित उपचार के लिए उद्यानों के समीप रेस्क्यू सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।
केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैव-विविधता भारतीय संस्कृति और सभ्यता की अंतरात्मा है। उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी घाटी और अमरकंटक व पातालकोट जैसी जगहें हमारी प्राकृतिक विरासत के सर्वोत्तम उदाहरण हैं। उन्होंने वैश्विक संदर्भ साझा करते हुए बताया कि यद्यपि भारत के पास वैश्विक भूमि का मात्र 2.4 प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन यहाँ दुनिया की लगभग 8 प्रतिशत के बराबर 36 हजार समृद्ध वानस्पतिक प्रजातियां मौजूद हैं। देश के 58 टाइगर रिजर्व्स न केवल बाघों का घर हैं, बल्कि वे 600 से अधिक जल धाराओं के उद्गम स्थल भी हैं, जो हमारी नदियों को जीवन देती हैं। उन्होंने देश की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 2030 तक के कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लक्ष्य का 90 फीसदी हिस्सा हासिल कर लिया है और शेष 10 प्रतिशत को समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने विकास और पर्यावरण के संतुलन पर जोर देते हुए बताया कि देश में रामसर साइट्स की संख्या 2014 के 24 से बढ़कर अब 99 हो गई है और जल्द ही यह 100 के आंकड़े को पार कर जाएगी। मध्यप्रदेश का इंदौर शहर अब एक मान्यता प्राप्त ‘वेटलैंड सिटी’ है, जो सतत विकास का उदाहरण है। उन्होंने पर्यावरण को क्षति न पहुंचाने के संकल्प के साथ स्थानीय समुदायों की आय बढ़ाने के लिए ‘एक्ट लोकली, थिंक ग्लोबली’ के सिद्धांत पर काम करने की आवश्यकता जताई।
केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कार्यक्रम में कोरल रीफ की स्थिति और बदलते मानसून चक्र के कारण कृषि पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने ‘मिशन लाइफ’ के तहत देश भर में गठित की गई 2 लाख से अधिक स्थानीय समितियों की भूमिका की सराहना की और सुझाव दिया कि महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को भी जैव-विविधता पार्कों के प्रबंधन से जोड़ा जाना चाहिए। कूनो नेशनल पार्क के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने इतिहास का संदर्भ देते हुए कहा कि भारत में वर्ष 1952 में चीते विलुप्त घोषित किए गए थे, जिसके बाद वर्ष 2021 के एक्शन प्लान के तहत 2022 से नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों का आगमन हुआ। वर्तमान में देश में कुल 53 चीते हैं, जिनमें से 33 का जन्म भारतीय धरती पर हुआ है। इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (आईबीसीए) के महानिदेशक डॉ. एस.पी. यादव ने बताया कि इस वैश्विक संगठन में अब तक 25 देश शामिल हो चुके हैं, जो दुनिया की 7 प्रमुख बिग कैट प्रजातियों के अवैध शिकार को रोकने और उनके संरक्षण के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
इस गरिमामयी समारोह में पर्यावरण और वन मंत्रालय के केंद्रीय सचिव तन्मय कुमार, डीजी फॉरेस्ट सुशील अवस्थी, संस्थान के निदेशक के. रविचंद्रन, वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) समिता राजौरा सहित पोस्ट मास्टर जनरल और वन्यजीव विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण के अध्यक्ष वीरेंद्र आर. तिवारी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।



