मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली ढांचे को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिए कड़े निर्देश

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में ऊर्जा विभाग के कामकाज की उच्च स्तरीय समीक्षा की। इस बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पारंपरिक बिजली उत्पादन के साथ-साथ राज्य में सौर ऊर्जा के उपयोग को अधिकतम स्तर तक ले जाया जाए। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के लिए सोलर पंप और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सौर उपकरणों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देने की बात कही। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
तकनीकी नवाचारों की सराहना और ड्रोन पेट्रोलिंग की सफलता
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग द्वारा अपनाई गई आधुनिक तकनीकों और नवाचारों की खुलकर तारीफ की। अधिकारियों ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों के दौरान राज्य में ड्रोन आधारित पेट्रोलिंग का प्रयोग बेहद सफल रहा है। इस आधुनिक तकनीक की मदद से बिजली लाइनों में होने वाली ट्रिपिंग को 35 प्रतिशत तक कम करने में कामयाबी मिली है। इसके अतिरिक्त, 220 केवी क्षमता के लगभग 10 हजार टावरों के शीर्ष भाग (टॉप पेट्रोलिंग) का निरीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। वर्तमान में इस व्यवस्था का विस्तार करते हुए 400 और 132 केवी के 23 हजार टावरों की निगरानी भी ड्रोन से की जा रही है।
बिजली आपूर्ति में सुधार के लिए भोपाल, इंदौर, जबलपुर और दमोह में इंसूलेटेड वर्क प्लेटफार्म जैसी आधुनिक प्रणाली का उपयोग शुरू किया गया है। इस तकनीक के माध्यम से लाइनमैन चालू बिजली लाइन पर भी ‘वेयर हैंड’ और ‘हॉट लाइन स्टिक’ प्रणालियों का उपयोग करके सुरक्षित रूप से सुधार कार्य कर सकते हैं। बीते वर्ष इस तकनीक की मदद से चालू लाइनों पर 257 सफल ऑपरेशन किए गए। इसके अलावा, तकनीकी कर्मचारियों और प्रशिक्षु इंजीनियरों को बेहतर व्यावहारिक ज्ञान देने के लिए एक विशेष परिचालन सिम्युलेटर भी स्थापित किया जा रहा है।
बिजली आपूर्ति का नया रिकॉर्ड और ‘समाधान योजना’ से राहत
बैठक में जानकारी दी गई कि मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने बिजली उत्पादन में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। गत 14 जनवरी को राज्य में इतिहास की सबसे अधिक 19,895 मेगावाट बिजली की मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। ट्रांसमिशन कंपनी ने भी अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए पारेषण हानियों को घटाकर केवल 2.60 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है, जबकि इसकी उपलब्धता दर 99.52 प्रतिशत दर्ज की गई है।
उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए लागू की गई ‘समाधान योजना 2025-26’ के तहत बिजली बिलों के देर से भुगतान पर लगने वाले सरचार्ज में बड़ी छूट दी गई। इसके चलते कुल 1,970 करोड़ रुपये के बकाया मामलों का निपटारा हुआ और उपभोक्ताओं का 473 करोड़ रुपये का अधिभार (सरचार्ज) माफ किया गया। राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने का काम भी तेजी से चल रहा है और तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा अब तक 40 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। सरकारी दफ्तरों में प्रीपेड मीटरिंग व्यवस्था के तहत 47 हजार से अधिक मीटर प्रीपेड मोड पर काम कर रहे हैं, जिसमें विभाग ने 139 प्रतिशत की भौतिक प्रगति हासिल की है।
नवकरणीय ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
विगत दो वर्षों में मध्य प्रदेश ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। मार्च 2024 में कुल बिजली क्षमता में नवकरणीय ऊर्जा का जो हिस्सा 25 प्रतिशत था, वह मार्च 2026 में बढ़कर 33 प्रतिशत हो चुका है। दो साल पहले तक जहाँ सौर और पवन जैसे स्रोतों से 5,690 मेगावाट बिजली मिल रही थी, वहीं अब यह उत्पादन बढ़कर 8,608 मेगावाट हो गया है। इस कुल उत्पादन में सबसे बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा का है, जिससे 5,376 मेगावाट बिजली मिल रही है। इसके अलावा पवन और अन्य नवीकरणीय स्रोतों से 3,232 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है।
केंद्रीय योजनाओं का क्रियान्वयन और जनजातीय क्षेत्रों का विद्युतीकरण
मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने बैठक में बताया कि विभाग कैबिनेट के फैसलों को लागू करने और राजस्व बढ़ाने को प्राथमिकता दे रहा है। केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय के परिणामस्वरूप जबलपुर आईलैंडिंग योजना के लिए 5.08 करोड़ रुपये और राज्य भार प्रेषण केंद्र की साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए 13.61 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान प्राप्त हुआ है।
इसके साथ ही, पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड से मिले 146 करोड़ रुपये के अनुदान की मदद से राज्य में 10,752 किलोमीटर लंबी ओपीजीडब्ल्यू (ऑप्टिकल ग्राउंड वायर) लाइन सफलतापूर्वक बिछाई गई है। ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कृष्ट अभियान’ के तहत 63 हजार से अधिक आदिवासी नागरिकों के घरों को रोशन किया गया है। वहीं, ‘पीएम जन-मन’ योजना के अंतर्गत विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों—बैगा, सहरिया और भारिया के 28 हजार से अधिक आवासों तक बिजली पहुंचाई गई है। कृषि क्षेत्र के लिए 374 फीडरों का पृथक्कीकरण किया गया है और एचटी लाइनों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े लगभग 18 हजार कार्य पूरे हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा जारी किए गए मुख्य दिशा-निर्देश:
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सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को समाज के हर वर्ग और स्तर पर तेजी से बढ़ावा दिया जाए।
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ग्रामीण अंचलों के सभी मजरों और टोलों के प्रत्येक घर तक बिजली पहुंचाने का काम पूरी मुस्तैदी से पूरा करें।
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बिजली बिलों की वसूली और नकद संग्रहण में जो बढ़ोतरी दर्ज हुई है, उसे लगातार बनाए रखा जाए।
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ऊर्जा विभाग ने वित्तीय घाटे में 2,500 करोड़ रुपये की कमी की है, इस सुधार प्रक्रिया को आगे भी जारी रखें।
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जबलपुर में ‘वन नेशन वन ग्रिड’ के तहत प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाएं।
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बिजली की बचत से जुड़े उपायों को व्यावहारिक रूप से निरंतर लागू किया जाए।
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भविष्य की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं का आकलन करते हुए समय से पहले ही तैयारियां पुख्ता की जाएं।
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मध्य प्रदेश विद्युत जनरेशन कंपनी के मुनाफे में आने पर मुख्यमंत्री ने कंपनी के प्रबंधन और पदाधिकारियों को बधाई दी।



