मध्यप्रदेश में सुगम सफर की तैयारी: 7 क्षेत्रों में चलेगी परिवहन सेवा, 1190 पदों पर होगी भर्ती

भोपाल स्थित मंत्रालय में सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में ‘मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ के संचालक मंडल की बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य में यातायात ढांचे को मजबूत करने के लिए ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के तहत एक राज्य स्तरीय और सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के गठन को हरी झंडी दी गई। इस योजना के अंतर्गत पूरे मध्यप्रदेश को सात विशिष्ट परिवहन क्षेत्रों में बांटकर चरणबद्ध तरीके से बसों का संचालन सुनिश्चित किया जाएगा, जिसकी शुरुआत आगामी जुलाई महीने में इंदौर से होगी। बैठक में परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह और मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित कई वरिष्ठ नीति-निर्माता उपस्थित थे।

प्रबंध संचालक मनीष सिंह द्वारा दिए गए प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि मध्यप्रदेश को इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर और रीवा जैसे 7 क्षेत्रीय मुख्यालयों में विभक्त किया गया है। सबसे पहले इंदौर क्षेत्र के सभी जिलों में बसों का जाल बिछाया जाएगा, जहां पहले से क्रियाशील ‘अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड’ (AICTSL) संपूर्ण संभाग के कार्यक्षेत्र को संभालेगी। जुलाई माह से यहां तीन श्रेणियों में बसें चलाई जाएंगी, जिनमें इंदौर से प्रदेश के अन्य जिलों के लिए इंटरसिटी मार्ग, शहरी एवं उपनगरीय क्षेत्रों के लिए अधिसूचित मार्ग, तथा महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के लिए अंतर-राज्यीय मार्ग शामिल हैं। इसके साथ ही जुलाई से ही इंदौर में 150 नई ई-बसों का संचालन भी शुरू हो जाएगा।

मार्गों और वाहनों के वर्गीकरण के तहत, सातों क्षेत्रीय मुख्यालयों से जिला मुख्यालयों को जोड़ने वाले कुल 620 रूट तय किए गए हैं, जहां 2432 बसें चलेंगी। इसमें से अकेले इंदौर क्षेत्र के लिए अंतर-जिलों के 121 मार्गों पर 608 बसें और शहरी परिवहन के लिए 28 मार्गों पर 784 बसें (150 पीएम ई-बसों को मिलाकर) आवंटित की गई हैं। पड़ोसी राज्यों के लिए तय 101 मार्गों पर 276 अंतर-राज्यीय बसें AICTSL के अधीन चलेंगी। समग्र रूप से देखा जाए तो इंदौर से प्रस्थान करने वाली कुल इंटरसिटी और अंतर-राज्यीय रूटों की संख्या 250 है, जिन पर 1688 बसों का परिचालन प्रस्तावित है।

योजना के वृहद स्वरूप की बात करें तो पूरे प्रदेश के सातों क्षेत्रों में सभी श्रेणियों के कुल 1164 मार्ग चिह्नित किए गए हैं, जिन पर 5206 बसें दौड़ेंगी। यह पूरा संचालन मोटरयान अधिनियम 1988 के वैधानिक नियमों के तहत स्कीम प्रकाशित होने के बाद किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस सरकारी पहल से वर्तमान में संचालित निजी बसों के अनुज्ञा-पत्रों (परमिट) पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा और वे पूर्व व्यवस्था के अनुसार ही चलती रहेंगी। बाकी के 6 क्षेत्रीय मुख्यालयों में भी वहां की स्थानीय सहायक कंपनियों द्वारा इसी तरह तीनों श्रेणियों की बसें चलाई जाएंगी।

प्रशासनिक मोर्चे पर, कंपनियों के सुचारू संचालन के लिए सेवा भर्ती नियम-2026 और कुल 1190 पदों को मंजूरी दी गई है, जिन्हें अगले 4 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से भरा जाएगा। मुख्य होल्डिंग कंपनी में आईटी एवं आईटीएमएस, प्लानिंग व अनुबंध, पॉलिसी व अनुसंधान, मानव संसाधन व विधि, अधोसंरचना, प्रवर्तन व गुणवत्ता तथा बिजनेस डेवलपमेंट जैसे 7 विभाग होंगे, जिनकी कमान मुख्य महाप्रबंधकों के हाथ में होगी। इन पदों पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) और तकनीकी विशेषज्ञों को अनुबंध, प्रतिनियुक्ति या संविलयन के जरिए नियुक्त किया जाएगा। मुख्य कंपनी में 140 पद और 7 सहायक क्षेत्रीय कंपनियों में कुल 150 पद उच्च, वरिष्ठ और कनिष्ठ प्रबंधन श्रेणियों में स्वीकृत किए गए हैं।

यात्रियों की सुरक्षा व बसों की आवाजाही को प्रदेश के सभी आईएसबीटी और बस स्टैंडों से जोड़ा जाएगा। गुणवत्ता और सुरक्षा नियंत्रण के लिए पुलिस, विशेष सशस्त्र बल और हाल ही में सेवानिवृत्त हुए अधिकारियों को संविदा या प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला कलेक्टरों को परिवहन व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने तथा नगरीय विकास विभाग को देनदारियों पर युक्तियुक्त निर्णय लेने को कहा। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने निर्देशित किया कि कैबिनेट के निर्णय के अनुरूप कंपनी की अधिकृत पूंजी 100 रुपये तथा पेड-अप कैपिटल 35 करोड़ रुपये रखी जाए। इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, संजय दुबे, मनीष रस्तोगी, दीपाली रस्तोगी, संजय शुक्ला सहित इंदौर के प्रशासनिक अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्मिलित हुए।

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