भोपाल के भारत भवन में ‘सदानीरा जल गंगा संवर्धन समारोह’ संपन्न: मुख्यमंत्री ने नदी जोड़ो परियोजनाओं और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण पर दिया जोर

भोपाल के भारत भवन में सोमवार की शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में सात दिवसीय ‘सदानीरा जल गंगा संवर्धन समारोह’ का समापन हुआ। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी दृष्टिकोण के कारण मध्यप्रदेश आज जल संरक्षण के मामलों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रधानमंत्री ने न केवल जल संचयन के प्रयासों को सराहा है, बल्कि राज्यों को केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं के माध्यम से भविष्य की जरूरतों के मुताबिक पानी का सही नियोजन करने के लिए भी प्रेरित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जल संपदा को सहेजने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य के साथ इस वर्ष गुड़ी पड़वा से राज्यव्यापी ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत पूरे मध्यप्रदेश में फैले करीब साढ़े तीन लाख पारंपरिक जल स्रोतों, जैसे कुओं, बावड़ियों और पोखरों को फिर से उपयोगी और स्वच्छ बनाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। उन्होंने सामूहिक प्रयासों पर बल देते हुए कहा कि जनभागीदारी ही किसी भी बड़े अभियान की सफलता की असली कुंजी होती है।

समारोह के दौरान जल प्रबंधन में विज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने मेपकास्ट (मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद) के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भूगर्भ जल का कृषि क्षेत्र में संतुलित उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधानों से ही संभव है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘वीर भारत न्यास’ और ‘मेपकास्ट’ के संयुक्त तत्वावधान में प्रकाशित भूजल एटलस और ‘अंतर्जलि यात्रा’ का विमोचन किया। इस दौरान लगी विशेष वैज्ञानिक प्रदर्शनियों ने अंतरराष्ट्रीय मेहमानों का भी ध्यान खींचा, जिनमें मैक्सिको, साइप्रस और फिजी के उच्चायुक्त व राजदूत प्रमुख रूप से शामिल थे।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राज्य को नदियों का मायका बताते हुए कहा कि यहां से उद्गम होने वाली नदियां आगे चलकर गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों को समृद्ध करती हैं। उन्होंने कहा कि सदियों से हमारे देश में जल सहेजने की समृद्ध परंपरा रही है, जिसका सबसे उत्कृष्ट उदाहरण राजा भोज द्वारा निर्मित भोपाल की बड़ी झील है। यह झील प्राचीन जल प्रबंधन और नगरीय सुरक्षा का एक बेजोड़ नमूना है। आज भी राज्य के कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी का मुख्य आधार यही जल और इसका सही प्रबंधन है।

समारोह के समापन अवसर पर वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान किया। इस प्रतिष्ठित मंच पर राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, केंद्रीय भू-जल बोर्ड के अशोक विश्वास और मेपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी के साथ-साथ पर्यावरणविद्, विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी और सांस्कृतिक विधाओं के कलाकार बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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