उच्च शिक्षा को रोजगार और आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर सरकार का जोर, मध्यप्रदेश में ‘कॉलेज चलो अभियान’ शुरू

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में उच्च शिक्षा को डिग्री तक सीमित न रखकर उसे कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने की प्रतिबद्धता जताई है। राज्य सरकार ने 31 मई से पूरे प्रदेश में “कालेज चलो अभियान” की शुरुआत की है, जिसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद कोई भी मेधावी छात्र संसाधनों की कमी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित न रहे। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत प्रदेश के युवाओं को तकनीकी नवाचार, उद्यमिता और आधुनिक विषयों से जोड़ा जा रहा है।

शासकीय नीतियों और शैक्षणिक बदलावों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के महाविद्यालयों में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, फिनटेक और बायो टेक्नोलॉजी जैसे समसामयिक विषयों की पढ़ाई कराई जा रही है। इसके साथ ही सरकारी कॉलेजों के पाठ्यक्रम में कृषि को एक विषय के रूप में शामिल किया गया है, जबकि विद्यालयों के स्तर पर पायलट ट्रेनिंग के पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है। युवाओं को व्यावहारिक अनुभव देने के लिए ‘सीखो-कमाओ योजना’ संचालित की जा रही है, जिससे वे सीधे उद्योगों के साथ जुड़कर प्रशिक्षण और आर्थिक लाभ दोनों प्राप्त कर रहे हैं। संत शिरोमणी रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की उन्नत तकनीकी ट्रेनिंग भी दी जा रही है, जिसके बल पर कई युवा अपने स्टार्ट-अप स्थापित कर रहे हैं।

प्रशासनिक स्तर पर शिक्षा को ‘स्टूडेंट फ्रेंडली’ बनाने के लिए विभिन्न आर्थिक सहायता योजनाएं चलाई जा रही हैं, ताकि कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए। विशेषकर छात्राओं और वंचित वर्ग के युवाओं को छात्रवृत्ति, फीस सहायता, छात्रावास तथा परिवहन की सुविधाएं देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। बालिकाओं के लिए क्रियान्वित ‘गांव की बेटी’ और ‘प्रतिभा किरण’ योजनाओं के बेहतर परिणाम मिले हैं, जिसके तहत छात्राओं को प्रति शैक्षणिक सत्र में 500 रुपये मासिक की दर से 10 महीनों के लिए कुल 5,000 रुपये की वित्तीय मदद दी जाती है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, “कॉलेज चलो अभियान” केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण की दिशा में युवाओं के सुनहरे भविष्य का संकल्प है। नई शिक्षा नीति के माध्यम से अब छात्र-छात्राओं को अपनी योग्यता और पसंद के अनुसार विषयों का चयन करने की पूरी आजादी मिली है। सरकार केवल प्रवेश की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

प्रदेश को अनुसंधान और नवाचार का मुख्य केंद्र बनाने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। वर्तमान में शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने के लिए एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, अनिवार्य इंटर्नशिप, कौशल आधारित शिक्षण और उद्योग-उन्मुख पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू होने से विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा की राह अधिक सुगम हुई है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार और व्यवसाय के लिए तैयार करने के साथ-साथ उनमें सामाजिक जिम्मेदारी और नेतृत्व क्षमता विकसित करना है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button