विदेशी निवेशकों के लिए रिजर्व बैंक ने आसान किए नियम, भारतीय रुपये में 50 पैसे की बड़ी रिकवरी

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से विदेशी निवेश को बढ़ावा देने वाले नीतिगत उपायों की घोषणा के बाद शुक्रवार को स्थानीय मुद्रा को बड़ी मजबूती मिली। डॉलर की तुलना में भारतीय रुपया 50 पैसे की जोरदार रिकवरी दर्ज करते हुए 95.24 के स्तर पर आ गया। विदेशी मुद्रा बाजार में सुबह रुपये में ट्रेडिंग की शुरुआत 95.72 के स्तर पर हुई थी, जो बीते कारोबारी सत्र के बंद भाव 95.74 की तुलना में काफी बेहतर रही और दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद यह 95.24 के स्तर पर बंद होने में सफल रहा।
चालू वित्त वर्ष (FY27) की दूसरी द्वि-मासिक मौद्रिक नीति पेश करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जानकारी दी कि मौद्रिक नीति समिति ने एक राय से नीतिगत दर (रेपो रेट) को 5.25% पर बरकरार रखने की मंजूरी दी है। नीतिगत रुख को भी ‘न्यूट्रल’ रखा गया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs), गैर-विदेशी भारतीयों (NRIs) और ओसीआई (OCIs) को बड़ी राहत देते हुए निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाने का एलान किया है।
घोषित किए गए नए उपायों के अंतर्गत इक्विटी निवेश की सीमा में बढ़ोतरी की गई है और सरकारी सिक्योरिटीज में विदेशी निवेशकों के प्रवेश को सुगम बनाया गया है। केंद्रीय बैंक ने फुल्ली एक्सेसिबल रूट (FAR) के विस्तार के साथ-साथ विदेशी मुद्रा विनिमय (स्वैप) और FCNR(B) जमा योजनाओं से जुड़े नियमों में ढील दी है, जिससे विदेशी धन का प्रवाह भारतीय बाजारों की तरफ बढ़ने की उम्मीद है।
इस नीतिगत बदलाव के उद्देश्यों को साझा करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि विदेशी मुद्रा विनिमय दर को लेकर आरबीआई की मूल नीति यथावत है, जिसके तहत रुपये का कोई निश्चित स्तर तय नहीं किया जाता। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नए नियमों से न केवल बाजार में पूंजी की उपलब्धता बढ़ेगी और निवेशकों का विश्वास सुदृढ़ होगा, बल्कि रुपये में होने वाले उतार-चढ़ाव पर भी लगाम लगेगी।
समीक्षा बैठक में केंद्रीय बैंक ने देश के आर्थिक विकास और महंगाई से जुड़े अपने पुराने पूर्वअनुमानों में कुछ बदलाव किए हैं। नए अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की जीडीपी वृद्धि दर 6.6% रहने की संभावना जताई गई है, जो पहले 6.9% आंकी गई थी। वहीं, खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है।
आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कच्चे तेल के ऊंचे दामों को आर्थिक मोर्चे पर एक संभावित जोखिम के रूप में स्वीकार किया है, लेकिन साथ ही देश के पास मौजूद 682 अरब डॉलर के विशाल विदेशी मुद्रा भंडार को इस स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त बताया। वैश्विक स्तर पर देखें तो ब्रेंट क्रूड का भाव भी करीब 1 फीसदी की तेजी के साथ 95.37 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेंड कर रहा था। नियामक द्वारा ब्याज दरों को लगातार दूसरी बार स्थिर रखने के बावजूद, निवेश के मोर्चे पर दी गई रियायतों को बाजार ने सकारात्मक रूप से लिया है।



