मध्य प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष 2026 के तहत नीतियां जारी रहेंगी, कृषक दल से मुलाकात में बोले मुख्यमंत्री

भोपाल में मंगलवार को आयोजित एक बैठक में कृषक समुदाय के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधियों ने राज्य में कृषि क्षेत्र के विकास और किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए उठाए गए सरकारी कदमों के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने दल को आश्वस्त करते हुए कहा कि वर्तमान वर्ष 2026 पूरी तरह से किसान कल्याण को समर्पित है और इसके अंतर्गत कृषि विकास के कार्य बिना रुके चलते रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्नदाताओं को सशक्त और समृद्ध बनाना ही उनकी सरकार का मुख्य ध्येय है।
इस मुलाकात का मुख्य केंद्र बिंदु हाल ही में संपन्न हुई गेहूं उपार्जन प्रक्रिया रही। प्रतिनिधिमंडल ने सुचारू और पारदर्शी गेहूं खरीदी व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। गौरतलब है कि चालू सीजन में 9 अप्रैल से लेकर 28 मई तक चली खरीद प्रक्रिया के दौरान मध्य प्रदेश ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश के 13.42 लाख किसानों से कुल 104.36 लाख मीट्रिक टन गेहूं की सरकारी खरीद की गई है। इसके चलते मध्य प्रदेश लाभान्वित होने वाले किसानों की संख्या के लिहाज से देश का नंबर एक राज्य बन गया है, जबकि कुल उपार्जन के मामले में वह पंजाब के बाद दूसरे पायदान पर है।
किसानों को फसल की सही कीमत समय पर दिलाने के लिए सरकार ने भुगतान व्यवस्था को मजबूत किया था। निर्धारित समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल पर 40 रुपये का अतिरिक्त बोनस देकर कुल भुगतान दर 2625 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई थी। इस नीति के तहत मध्य प्रदेश के किसानों को कुल 27,196.48 करोड़ रुपये की राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिली है।
मुख्यमंत्री के साथ बातचीत में किसान प्रतिनिधियों ने दो अन्य बड़े फैसलों की सराहना की। पहला निर्णय सहकारी ऋणों की अदायगी की समयसीमा से जुड़ा था, जिसे 31 मार्च से बढ़ाकर 31 मई किया गया था ताकि किसानों पर आर्थिक दबाव न पड़े। दूसरा निर्णय विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीनों के मुआवजे को चार गुना करने से संबंधित था। दल के सदस्यों ने इन दोनों नीतियों को किसान हित में उठाया गया बेहद क्रांतिकारी कदम बताया।
औपचारिक बातचीत के अंतिम चरण में किसान नेताओं ने कृषि व्यवस्था में सुधार के लिए मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपकर कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए। इनमें आगामी मूंग खरीदी की व्यवस्था को दुरुस्त करने, मूंग और उड़द उत्पादक किसानों के लिए सुगम पंजीकरण प्रक्रिया सुनिश्चित करने तथा जल संरक्षण के लिए नहरों को तालाबों से जोड़ने की मांग शामिल थी। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कमल सिंह आंजना और चंद्रकांत गौर कर रहे थे, जबकि दल में सर्वज्ञ दीवान, लक्ष्मी नारायण पटेल तथा प्रह्लाद पटेल जैसे प्रमुख किसान प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।


