नीट-यूजी परीक्षा की सुरक्षा को लेकर डीजीपी ने की समीक्षा, मध्य प्रदेश के 283 केंद्रों पर 1.18 लाख अभ्यर्थी देंगे परीक्षा

मध्य प्रदेश में आगामी 21 जून 2026 को होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित ढंग से आयोजित कराने के लिए राज्य पुलिस ने अपनी रणनीतिक तैयारियां पूरी कर ली हैं। पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक विशेष समीक्षा बैठक में पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को सुरक्षा को लेकर व्यापक गाइडलाइंस जारी कीं। इस बैठक के दौरान प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय, सोशल मीडिया एवं साइबर मॉनिटरिंग और परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं का विस्तृत खाका खींचा गया।

डीजीपी श्री कैलाश मकवाणा ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों से कहा कि परीक्षा की साख और विश्वसनीयता को अक्षुण्ण रखना हमारा परम दायित्व है। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्रों के प्राप्त होने की अवधि से लेकर उनके स्ट्रॉन्ग रूम में भंडारण, केंद्रों तक सुरक्षित डिलीवरी और परीक्षा उपरांत उत्तर पुस्तिकाओं (ओएमआर शीट) व गोपनीय सामग्रियों की सुरक्षित रवानगी तक की पूरी चेन पूरी तरह सुरक्षित और खामी रहित होनी चाहिए। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि इस पूरी व्यवस्था में किसी भी स्तर पर ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है।

परीक्षा की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए पुलिस महानिदेशक ने सभी जिलों की पुलिस को स्थानीय प्रशासन, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA), शिक्षा विभाग, बैंकों और अन्य सहयोगी संस्थाओं के साथ निरंतर संपर्क और समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी एसपी को 20 जून की समयसीमा देते हुए कहा कि वे स्वयं परीक्षा केंद्रों, बैंकों और प्रश्नपत्र भंडारण स्थलों का दौरा कर सुरक्षा का जायजा लें। केंद्रों पर लगे सीसीटीवी कैमरों, डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) की स्थिति, पुलिस बल के डिप्लॉयमेंट और छात्रों के प्रवेश प्रबंधन का कड़ाई से परीक्षण किया जाए।

पुलिस कप्तानों को हिदायत दी गई कि वे व्यक्तिगत रूप से अपने जिलों के परीक्षा केंद्रों का दौरा करें। प्रश्नपत्रों की सुरक्षित शिफ्टिंग, स्ट्रांग रूम की अभेद्य सुरक्षा, गोपनीय सामग्री के रखरखाव, यातायात व्यवस्था और किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत रिस्पॉन्स देने वाली प्रणाली की समय रहते समीक्षा कर ली जाए ताकि परीक्षा के दिन कोई बाधा न आए।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि से निपटने के लिए डीजीपी ने बताया कि राज्य के 38 साइबर कमांडो को विशेष रूप से तैनात किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लगातार नजर रखने, पेपर लीक की अफवाहों का खंडन करने और नकल कराने वाले गिरोहों पर अंकुश लगाने के लिए साइबर सर्विलांस को और अधिक धारदार बनाने के निर्देश दिए। पूर्व में परीक्षा घोटालों या नकल के मामलों में पकड़े गए अपराधियों और संदिग्धों की गतिविधियों की भी लगातार निगरानी करने को कहा गया है।

नकल माफिया और अफवाह फैलाने वालों को चेतावनी देते हुए डीजीपी श्री मकवाणा ने कहा कि परीक्षा से जुड़ी किसी भी भ्रामक जानकारी या पेपर लीक के दावों पर त्वरित और कठोरतम कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सरकार और पुलिस प्रशासन इस मामले में ‘शून्य सहिष्णुता’ (जीरो टॉलरेंस) की नीति पर अडिग हैं। उन्होंने परीक्षा के दौरान संदिग्ध होटलों, धर्मशालाओं, लॉज और कोचिंग सेंटरों की आकस्मिक जांच के निर्देश दिए और कहा कि परीक्षा के अंतिम 72 घंटों में जिला स्तरीय कमेटियां विशेष रूप से सक्रिय रहकर निगरानी बढ़ाएं।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस वर्ष मध्य प्रदेश के 283 केंद्रों पर करीब 1 लाख 18 हजार परीक्षार्थी इस परीक्षा में बैठेंगे, जिनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जिलों में केंद्रों की संख्या सर्वाधिक है। बैठक में पुलिस महकमे के कई आला अधिकारी शामिल हुए, जिनमें अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्तवार्ता) श्री ए. साईं मनोहर, उप पुलिस महानिरीक्षक श्री तरुण नायक, पीएसओ टू डीजीपी डॉ. विनीत कपूर, एसओ टू डीजीपी श्री मलय जैन, एसपी (एटीएस) श्री प्रणय नागवंशी और एआईजी श्रीमती विनीता मालवीय प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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