तारकेश्वर से पीएम मोदी ने जारी की किसान सम्मान निधि की 23वीं किश्त, मध्यप्रदेश के 81 लाख किसानों को मिले 1640 करोड़ रुपए

शनिवार को पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर (हुगली) में आयोजित एक भव्य राष्ट्रीय समारोह से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के 9.40 करोड़ से अधिक कृषकों के खातों में पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किश्त के रूप में 18,880 करोड़ रुपए की राशि सीधे ट्रांसफर की। इस योजना के माध्यम से देश के किसानों को संबल प्रदान करते हुए प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में प्राकृतिक कृषि को जनआंदोलन बनाने की वकालत की। उन्होंने देश के अन्नदाताओं से रासायनिक उर्वरकों और घातक कीटनाशकों का त्याग कर अपनी मातृभूमि की रक्षा करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि प्रकृति हमारी माता है और भूमि की सेहत को दुरुस्त रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का प्राथमिक ध्येय मिट्टी की जैविक क्षमता को पुनर्जीवित करना है। इस पद्धति को अपनाने से भूमि में केंचुओं और सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ती है, जो फसलों को आवश्यक पोषण देने में सहायक सिद्ध होते हैं। भूमि की दीर्घकालिक उत्पादकता को बनाए रखने के लिए स्वस्थ मिट्टी का होना अनिवार्य है, क्योंकि यही उन्नत कृषि का मुख्य आधार है।
प्रधानमंत्री ने देश के किसानों को सचेत करते हुए कहा कि हमें अपनी भावी पीढ़ी को बंजर और अनुपजाऊ जमीन विरासत में देने से बचना होगा। केंद्र सरकार द्वारा संचालित ‘खेत बचाओ अभियान’ का जिक्र करते हुए उन्होंने देश के कोने-कोने से किसानों को इस अभियान से जुड़ने और अपने खेतों की मिट्टी की जांच कराने के लिए प्रेरित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से धरती की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है, जिसे रोकना अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में जन-भागीदारी की आवश्यकता जताई। उन्होंने आगामी 21 जून को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए नागरिकों से अच्छे स्वास्थ्य के लिए योग अपनाने की बात कही।
उल्लेखनीय है कि फरवरी 2019 में शुरू की गई इस कल्याणकारी योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6 हजार रुपए की राशि दो-दो हजार रुपए की तीन समान किश्तों में दी जाती है। शनिवार को हस्तांतरित की गई 23वीं किश्त से मध्यप्रदेश के 81 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं, जिनके खातों में कुल 1640 करोड़ रुपए पहुंचे हैं। इस नवीन किश्त को मिलाकर मध्यप्रदेश के कृषक परिवारों को अब तक कुल 22 किश्तों में 33 हजार 800 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। इस कार्यक्रम का दूरदर्शन और अन्य माध्यमों से देशव्यापी सीधा प्रसारण किया गया।
इस बीच, भोपाल के बरखेड़ीकला में स्थित राज्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान (सिपेट) में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह कृषक संगोष्ठी’ में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिरकत की और प्रधानमंत्री के भाषण को लाइव सुना। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज देश रामराज्य की स्थापना की ओर अग्रसर है। उन्होंने समाज के हर वर्ग, विशेषकर गांव, गरीब, युवा, महिला और अन्नदाता के सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कार्य किए हैं। मुख्यमंत्री ने केन-बेतवा जैसी दो बड़ी नदी जोड़ो परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री का आभार प्रकट किया और कहा कि इससे प्रदेश के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में हरियाली आएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों के लिए समर्पित है और इसी कड़ी में प्रदेश में ‘कृषक कल्याण वर्ष’ मनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से होने वाली कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि प्राकृतिक खेती के मामले में मध्यप्रदेश पूरे देश में अग्रणी स्थान पर है। राज्य सरकार प्राकृतिक कृषि उत्पादों के विपणन और किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश में गोशालाओं का तेजी से नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, और गौपालक किसानों को प्रति गाय 1100 रुपए मासिक की आर्थिक मदद दी जा रही है। उन्होंने पूर्व में गेहूं पर दिए गए बोनस का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों से 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से उपार्जन किया गया है। जलवायु परिवर्तन के इस युग में उन्होंने जल संरक्षण को समय की सबसे बड़ी मांग बताया।
वर्तमान में मध्यप्रदेश गेहूं, सोयाबीन और दलहन उत्पादन में देश का एक प्रमुख केंद्र है। अब राज्य प्राकृतिक कृषि के क्षेत्र में भी नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, जहां लगभग 3 लाख एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक और जैविक खेती की जा रही है। कृषकों को आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रदेश के 56 कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि महाविद्यालय निरंतर कार्य कर रहे हैं। सरकार द्वारा राज्य में एक हजार से अधिक बायो रिसर्च सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जो सीधे किसानों की मदद करेंगे। इसके अलावा, ग्रामीण स्तर पर मार्गदर्शन के लिए 3 हजार से अधिक कृषि सखियों और 200 से अधिक कृषि वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित किया गया है। कार्यक्रम में विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, जनप्रतिनिधि श्री रविन्द्र यति, अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल, आयुक्त श्रीमती अनुभा श्रीवास्तव, और भोपाल कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्रा सहित कई गणमान्य नागरिक और कृषक उपस्थित थे।

