नशामुक्त समाज के लिए मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी पहल, ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान से जुड़े लाखों नागरिक

मध्यप्रदेश में नशामुक्ति की दिशा में पुलिस विभाग द्वारा शुरू किया गया राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” व्यापक रूप लेता जा रहा है। स्वस्थ, नशामुक्त और सशक्त समाज की स्थापना के संकल्प के साथ शुरू हुए इस अभियान के दूसरे दिन ही पुलिस ने प्रदेशभर में 1000 से अधिक विशेष कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से सीधे तौर पर 2 लाख 60 हजार से अधिक नागरिकों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया गया। अभियान के तहत जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्कूल-कॉलेजों में संवाद, जागरूकता रैलियां, शपथ ग्रहण, लघु फिल्मों का प्रदर्शन, सोशल मीडिया अभियानों और सार्वजनिक स्थलों पर सघन जनसंपर्क जैसी बहुआयामी रणनीतियों का सहारा लिया जा रहा है।
नई पीढ़ी को इस लत से बचाने के लिए अभियान का मुख्य फोकस युवाओं और विद्यार्थियों पर रखा गया है। पुलिस अधिकारियों और टीमों ने विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में पहुंचकर छात्र-छात्राओं को नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसानों के बारे में विस्तार से समझाया। शैक्षणिक परिसरों में शिक्षकों और विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने तथा एक सकारात्मक जीवनशैली अपनाने की सामूहिक शपथ दिलाई गई। इस दौरान युवाओं को आकर्षित करने और बात को प्रभावी ढंग से समझाने के लिए आधुनिक माध्यमों जैसे अवेयरनेस रील्स और शॉर्ट वीडियो क्लिपिंग्स का भी प्रदर्शन किया गया। साथ ही, सार्वजनिक स्थलों जैसे बस स्टैंड, हाट-बाजारों और चौराहों पर पुलिस ने आम जनता से सीधा संवाद स्थापित कर मानव श्रृंखलाओं के जरिए नशामुक्त समाज का संदेश प्रसारित किया।
भौगोलिक दृष्टि से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में इस अभियान को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। बालाघाट जिले में पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए 12 थाना क्षेत्रों में 32 हजार से अधिक लोगों तक अपनी बात पहुंचाई और 12,000 से ज्यादा नागरिकों को ऑनलाइन शपथ दिलाकर क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल सर्टिफिकेट प्रदान किए। बालाघाट में जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भी विशेष स्टॉल लगाकर 2500 से अधिक श्रद्धालुओं को डिजिटल माध्यम से अभियान से जोड़ा गया। व्यापारिक नगरी इंदौर में स्थानीय डिजिटल इंफ्लुएंसर्स के साथ बैठक कर सोशल मीडिया पर अभियान को प्रभावी बनाने की रूपरेखा तैयार की गई। इंदौर में नशामुक्ति रथ चलाने के साथ ही इस अभियान को स्वास्थ्य जांच और कैंसर स्क्रीनिंग जैसी जनकल्याणकारी गतिविधियों से भी जोड़ा गया। उधर ग्वालियर में भी 40 थाना क्षेत्रों के अंतर्गत 62 विशेष कार्यक्रम संपन्न हुए, जबकि खरगोन, छतरपुर, कटनी, खंडवा, आगर-मालवा, अनूपपुर और उमरिया में भी जमीनी स्तर पर व्यापक गतिविधियां हुईं।
अभियान का असर भोपाल सहित प्रदेश के पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में भी स्पष्ट रूप से देखा गया। भोपाल ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित 7 कार्यक्रमों में 2,100 लोग शामिल हुए, वहीं भोपाल शहरी क्षेत्र में भी व्यापक अभियान चला। सीहोर, हरदा, दमोह, दतिया, उज्जैन, जबलपुर और गुना जैसे जिलों में पुलिस की सक्रियता से अभियान को गति मिली। आलीराजपुर और आगर-मालवा में जहां शॉर्ट फिल्मों के जरिए विद्यार्थियों को जागरूक किया गया, वहीं आलीराजपुर में बालिकाओं की सुरक्षा के दृष्टिगत ‘गुड टच-बैड टच’ की काउंसलिंग भी की गई। पीटीएस पचमढ़ी में पुलिस स्टाफ और उनके परिवारों सहित नव-आरक्षकों को ऑनलाइन शपथ दिलाकर प्रमाण-पत्र बांटे गए। पीटीएस उमरिया और आरएपीटीसी इंदौर द्वारा कंट्रोल रूम से रैलियां निकालकर गांधी चौक जैसे सार्वजनिक स्थलों पर शपथ दिलाई गई। पीटीएस उज्जैन में पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में 640 नव-आरक्षकों ने एक साथ नशामुक्ति का संकल्प लिया, जिसके बाद ताजपुर ग्राम पंचायत में भी ग्रामीणों को जागरूक किया गया।
सड़क और समाज के साथ-साथ इस अभियान का विस्तार रेलवे परिसरों तक भी देखने को मिला। जीआरपी (शासकीय रेलवे पुलिस) की टीमों ने रेलवे स्टेशनों पर मुसाफिरों, छात्रों, कुलियों, दुकानदारों और ऑटो चालकों से संवाद कर उन्हें इस मुहिम का हिस्सा बनाया। पूरे राज्य में चले इस सिलसिलेवार अभियान के दौरान समाज के सभी वर्गों ने सामूहिक शपथ लेकर खुद को और अपने करीबियों को नशे की विभीषिका से दूर रखने का दृढ़ संकल्प लिया। मध्यप्रदेश पुलिस का यह प्रयास केवल शासकीय आयोजनों तक सीमित न रहकर सामाजिक सुधार का एक बड़ा आंदोलन बनता दिख रहा है, जिसमें समाज के प्रबुद्ध जनों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से नशामुक्त समाज के निर्माण में आगे आने की अपील की गई है।



