मानसून सत्र का पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ा; लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित

संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन यानी सोमवार को विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही पूरी तरह प्रभावित रही। विपक्षी सांसदों द्वारा लगातार की जा रही नारेबाजी और चर्चा की मांग के चलते लोकसभा और राज्यसभा में बार-बार बाधा आई, जिसके बाद दोनों सदनों की बैठक को मंगलवार सुबह तक के लिए स्थगित कर देना पड़ा।
हंगामे के बीच ही लोकसभा में एक महत्वपूर्ण विधायी कार्य संपन्न हुआ, जहां सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 करने से जुड़ा ‘सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया गया। दूसरी ओर, राज्यसभा में ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान का दर्जा देने से संबंधित विधेयक प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष ने कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी और छह पूर्व सांसदों के निधन पर शोक जताया। श्रद्धांजलि देने के बाद विपक्ष के कड़े रुख को देखते हुए सदन को पहले दोपहर 12 बजे तक के लिए रोका गया। इसके बाद तीन बार छोटे-छोटे अंतरालों के लिए स्थगन हुआ और अंततः दोपहर तीन बजे बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। इसी संक्षिप्त अवधि के दौरान केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शीर्ष अदालत में जजों की संख्या में वृद्धि वाला विधेयक पटल पर रखा।
उच्च सदन यानी राज्यसभा में कार्यवाही के शुरुआती चरण में नौ नए निर्वाचित सदस्यों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। शपथ लेने वालों में गुजरात से मुकेशभाई जे. राठवा, कर्नाटक से पवन खेड़ा, मध्य प्रदेश से महेश केवट, मेघालय से जेम्स पांगसांग कोंगकल संगमा, मिजोरम से खियांगते ललतलुआगकिमा, राजस्थान से सतीश पूनिया तथा पश्चिम बंगाल से प्रकाश चिक बराइक, सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर राय शामिल रहे। इसके उपरांत सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने पूर्व सदस्यों बलबीर पुंज, स्वपन साधन बोस, रंगासायी रामकृष्ण और एच. हनुमंथप्पा के साथ कतर के पूर्व अमीर को श्रद्धांजलि दी।
शोक संदेश के तुरंत बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज, नीट परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक का मामला उठाया। उन्होंने इन गंभीर मुद्दों पर तुरंत बहस कराने की मांग की। विपक्षी सदस्यों के आक्रामक विरोध के चलते सदन को कई बार—दोपहर 12:00, 12:30, 12:50, 2:00 और 2:30 बजे तक स्थगित करना पड़ा।
अपरान्ह में जब बैठक दोबारा शुरू हुई, तो उपसभापति हरिवंश ने सदस्यों से संसदीय गरिमा बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संसद विचार-विमर्श का प्रमुख माध्यम है और पूरे दिन कोई भी विधायी कार्य संपन्न नहीं हो पाया है। इसके बावजूद जब हंगामा शांत नहीं हुआ, तो उन्होंने राज्यसभा की कार्यवाही को मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए मुल्तवी कर दिया।



