भारत और उत्तर मैसिडोनिया के व्यापारिक संबंधों में अपार संभावनाएं, राष्ट्रपति मुर्मु ने निवेश और तकनीक पर दिया जोर

मंगलवार को स्कोप्ये में आयोजित ‘भारत-उत्तर मैसिडोनिया व्यापार मंच’ में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक संबंधों को सशक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि द्विपक्षीय व्यापार में निरंतर वृद्धि हो रही है, लेकिन वर्तमान स्तर उपलब्ध अवसरों की तुलना में बेहद सीमित है। राष्ट्रपति ने दोनों राष्ट्रों के आर्थिक हितों को साधने के लिए दीर्घकालिक साझेदारियों, निवेश और तकनीकी आदान-प्रदान को प्राथमिक आवश्यकता बताया।
यह ऐतिहासिक अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह किसी भी भारतीय राष्ट्रपति की उत्तर मैसिडोनिया की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। राष्ट्रपति मुर्मु ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यह दौरा दोनों देशों के मध्य सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत करने और आपसी प्रतिबद्धता को दोहराने का सशक्त माध्यम है। केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित रहने के बजाय इसे एक वास्तविक और मजबूत आर्थिक साझेदारी में बदलने के लिए निवेश का दायरा बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।
व्यापार मंच को संबोधित करते हुए उन्होंने उन प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान की जहां सहयोग की असीमित संभावनाएं मौजूद हैं। इनमें डिजिटल नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फार्मास्युटिकल्स, स्वास्थ्य सेवा, कृषि-प्रसंस्करण और हरित ऊर्जा परिवर्तन शामिल हैं। राष्ट्रपति ने इन क्षेत्रों को भविष्य की आर्थिक वृद्धि का आधार बताया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उत्तर मैसिडोनिया के प्रतिनिधियों को आगामी वर्ष भारत में आयोजित होने वाले ‘वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट’ (WAVES) में सम्मिलित होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भी दिया।
दोनों देशों के तकनीकी परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि स्टार्ट-अप, शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान केंद्रों और प्रौद्योगिकी कंपनियों को मिलकर काम करना चाहिए। यह साझा प्रयास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और डिजिटल नवाचार के क्षेत्रों में नई खोजों और नवाचार को जन्म दे सकता है। दोनों देशों के तकनीकी तंत्र को एक-दूसरे के अनुभवों का लाभ उठाना चाहिए।
व्यापारिक संगठनों और उद्योग जगत की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने दोनों पक्षों के चैंबर ऑफ कॉमर्स, निवेश एजेंसियों और व्यावसायिक समूहों से परस्पर संपर्क बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक प्रतिनिधिमंडलों के नियमित आदान-प्रदान से परस्पर लाभकारी परियोजनाओं को चिन्हित करने और टिकाऊ कारोबारी संबंध स्थापित करने में मदद मिलेगी।
अपने संबोधन के अंतिम चरण में राष्ट्रपति ने कंपनियों को तात्कालिक वाणिज्यिक सौदों से आगे सोचने की सलाह दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि कंपनियों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त उद्यमों (जॉइंट वेंचर्स), स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन और रोजगार के अवसरों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह व्यापार मंच द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग के लिए नए और समृद्ध मार्गों का निर्माण करेगा।



