दुग्ध उत्पादन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने की कोई योजना नहीं: केंद्र सरकार

केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने का वर्तमान में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने लोकसभा में एक तारांकित प्रश्न का लिखित उत्तर देते हुए बताया कि दूध की दरें पूर्ववत बाजार की स्थितियों के आधार पर ही तय होंगी, जिन्हें सहकारी समितियाँ और निजी डेयरियाँ निर्धारित करती रहेंगी। सरकार का मुख्य ध्यान किसानों के व्यापक हितों की रक्षा के लिए अन्य विकासात्मक कदम उठाने पर है।
संसदीय जवाब के दौरान केंद्रीय मंत्री ने डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संचालित विभिन्न सरकारी पहलों का ब्योरा साझा किया। उन्होंने बताया कि इस दिशा में मार्च 2026 तक गाँव के स्तर पर 36,283 नई डेयरी सहकारी समितियों (डीसीएस) का गठन किया गया है, जबकि 31,150 पूर्व से संचालित सोसायटियों को और अधिक मजबूत बनाया गया है। इसके अलावा, दूध को सुरक्षित रखने के लिए दैनिक स्तर पर 168 लाख लीटर शीतलन (चिलिंग) क्षमता तैयार की गई है और 76,748 गुणवत्ता परीक्षण उपकरण वितरित किए गए हैं। साथ ही, प्रतिदिन 418 लाख लीटर दूध के प्रसंस्करण और उसमें मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) से जुड़ी परियोजनाओं को स्वीकृत किया गया है।
देश में दुग्ध उत्पादन के आंकड़ों को रेखांकित करते हुए सरकार ने सदन में जानकारी दी कि वर्ष 2024-25 के दौरान कुल दुग्ध उत्पादन बढ़कर 248 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) तक पहुँच गया है। यह आंकड़ा वर्ष 2014-15 के 146 एमएमटी उत्पादन की तुलना में करीब 69 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि प्रदर्शित करता है। उत्पादन में हुई इस बढ़ोतरी में नस्ल सुधार, आनुवंशिक विकास, कृत्रिम गर्भाधान, सेक्स-सॉर्टेड सीमेन और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) जैसी आधुनिक तकनीकों की अहम भूमिका रही है। देशभर में कुल 17.27 करोड़ कृत्रिम गर्भाधान किए गए, जिसके परिणामस्वरूप इसकी पहुँच 20 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत दर्ज की गई, वहीं प्रति पशु दुग्ध उत्पादकता में भी 67 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
बाजार की संरचना और गुणवत्ता मानकों पर बात रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत के कुल दुग्ध उत्पादन का लगभग 63 प्रतिशत हिस्सा बिक्री के लिए बाजार तक पहुँचता है। हालांकि, इस विपणन योग्य अधिशेष (मार्केटेबल सरप्लस) का 68 प्रतिशत हिस्सा अब भी असंगठित क्षेत्र के पास ही है। इसी स्थिति को बदलने के लिए सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे का विस्तार कर रही है, ताकि संगठित खरीद को प्रोत्साहन मिल सके।
इसके साथ ही, आम उपभोक्ताओं तक शुद्ध दूध पहुँचाने के उद्देश्य से भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) राज्यों की खाद्य सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से देशभर में आपूर्ति किए जाने वाले दूध के गुणवत्ता मानकों की निरंतर निगरानी कर रहा है। सरकार की प्राथमिकता दुग्ध उत्पादकों को संगठित तंत्र से जोड़ना, दूध की दरों में स्थिरता बनाए रखना और उपभोक्ताओं के हितों को सुरक्षित रखना है।



