देशभर में 20 हजार से अधिक जन औषधि केंद्र संचालित, मरीजों के इलाज खर्च में आई भारी कमी

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना के माध्यम से देश के नागरिकों को बीते 12 वर्षों में लगभग 45,000 करोड़ रुपये की आर्थिक राहत मिली है। शुक्रवार को संसद के निचले सदन में सरकार ने बताया कि इस समय देश के विभिन्न राज्यों में 20,149 जन औषधि केंद्र सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं।

रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में लिखित विवरण प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य इलाज के दौरान मरीजों पर पड़ने वाले प्रत्यक्ष वित्तीय बोझ को घटाना है। सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता से आम जनता को बड़ी राहत मिली है।

योजना की उत्पाद सूची में वर्तमान में 2,110 औषधियां और 315 सर्जिकल एवं मेडिकल उपकरण शामिल हैं। इनमें गंभीर एवं दीर्घकालिक बीमारियों जैसे- कैंसर, हृदय रोग, डायबिटीज, न्यूट्रास्यूटिकल्स और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं की दवाएं रियायती दरों पर दी जा रही हैं।

वर्तमान में यह नेटवर्क देश के 776 जिलों तक विस्तृत हो चुका है। राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची के अंतर्गत आने वाली अधिकतर जेनेरिक औषधियां इन केंद्रों पर बिक्री के लिए मौजूद हैं, हालांकि टीकों और प्रयोगशाला अभिकर्मकों को इस सूची से अलग रखा गया है।

दवाओं की कमी न हो, इसके लिए सरकार ने 100 सबसे ज्यादा बिकने वाली और बाजार की 100 तेजी से खपत वाली दवाओं का न्यूनतम स्टॉक रखना अनिवार्य किया है। इस मानक को पूरा करने वाले केंद्र संचालकों के लिए मासिक प्रोत्साहन राशि का प्रावधान भी किया गया है।

संचालन प्रक्रिया को मजबूत बनाने हेतु ‘फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेज ब्यूरो ऑफ इंडिया’ (PMBI) नियमित रूप से इन केंद्रों का मूल्यांकन करता है। इस निगरानी तंत्र का मुख्य उद्देश्य आपूर्ति चक्र को सुचारू रखना और दवाओं की किल्लत को तुरंत दूर करना है।

इसके अतिरिक्त, अधिकाधिक लोगों तक इस सुविधा का लाभ पहुंचाने के लिए सरकार पीआईबी, केंद्रीय संचार ब्यूरो और डिजिटल मंचों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियानों का संचालन कर रही है।

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