भारत में बढ़ा स्टील का उत्पादन, पहली तिमाही में दर्ज हुई 4.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत के इस्पात क्षेत्र ने अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखते हुए उल्लेखनीय बढ़त हासिल की है। इस्पात मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 की अवधि के दौरान देश के फिनिश्ड स्टील उत्पादन में सालाना आधार पर 4.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

मंत्रालय के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कुल फिनिश्ड स्टील का उत्पादन 4.06 करोड़ टन रहा, जो बीते वित्त वर्ष की इसी तिमाही के 3.87 करोड़ टन के मुकाबले काफी बेहतर है। केवल जून 2026 के महीने की बात करें तो उत्पादन 1.35 करोड़ टन तक पहुंच गया, जो जून 2025 में दर्ज किए गए 1.30 करोड़ टन से 3.8 प्रतिशत अधिक है। इसके अतिरिक्त, इस तिमाही के दौरान क्रूड स्टील का उत्पादन भी 3 प्रतिशत बढ़कर 4.21 करोड़ टन हो गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 4.08 करोड़ टन था।

घरेलू बाजार में इस्पात की मांग में यह तेज उछाल बुनियादी ढांचे के विकास पर दिए जा रहे विशेष जोर के कारण देखने को मिला है। जून के दौरान फिनिश्ड स्टील की घरेलू खपत में 25.6 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर राजमार्गों, रेल नेटवर्क और बंदरगाहों के आधुनिकीकरण एवं निर्माण कार्यों में किए जा रहे भारी निवेश ने बाजार में इस्पात की मांग को सीधे तौर पर गति दी है। वहीं जून 2026 में क्रूड स्टील का उत्पादन भी 4.5 प्रतिशत बढ़कर 1.41 करोड़ टन दर्ज किया गया।

देश में इस्पात निर्माण की क्षमता का दायरा भी लगातार विस्तृत हो रहा है। जून 2026 तक भारत की कुल क्रूड स्टील उत्पादन क्षमता बढ़कर लगभग 22.2 करोड़ टन प्रति वर्ष के स्तर पर पहुंच गई है। यह प्रगति दर्शाती है कि भारत राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत वर्ष 2030 तक 30 करोड़ टन प्रति वर्ष उत्पादन क्षमता हासिल करने के अपने निर्धारित लक्ष्य की दिशा में सही गति से आगे बढ़ रहा है।

सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख इस्पात उत्पादक कंपनी सेल (एसएआईएल) ने भी इस दिशा में शानदार प्रदर्शन किया है। मई 2026 में वित्तीय वर्ष 2025-26 के नतीजे घोषित करते हुए कंपनी ने 1,10,810 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित करने और 1.993 करोड़ टन की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज करने की जानकारी दी थी। सालाना आधार पर बिक्री में आई 11.4 प्रतिशत की यह बढ़त मजबूत बाजार मांग और कंपनी के बेहतर कार्य-कुशलता को उजागर करती है।

इसके साथ ही, सरकार अपनी भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कच्चे माल की आपूर्ति सुरक्षित करने पर काम कर रही है। इसके तहत सेल और एनएमडीसी रूस में कोकिंग कोल तथा निकेल परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के अवसरों की समीक्षा कर रहे हैं। मई 2026 के रूस दौरे के उपरांत सेल ने इस संबंध में एक आंतरिक समिति का गठन किया है, जबकि एनएमडीसी लंबे समय के लिए कच्चे माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विदेशी संपत्तियों का मूल्यांकन कर रही है।

पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन तकनीकों की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। सेल के भिलाई स्टील प्लांट को टीएमटी बार के लिए एनवायरनमेंटल प्रोडक्ट डिक्लेरेशन (ईपीडी) प्रमाणन हासिल हुआ है, जो इसके टिकाऊ उत्पादन मानकों को साबित करता है। इसके अलावा, प्लांट की 15 मेगावाट क्षमता वाली फ्लोटिंग सोलर परियोजना सालाना लगभग 3.43 करोड़ यूनिट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन कर रही है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कटौती संभव हो सकी है। सरकार का मानना है कि ये कदम भारतीय इस्पात उद्योग को वैश्विक एवं घरेलू स्तर पर ‘ग्रीन स्टील’ की बढ़ती मांग के अनुरूप ढालने में मददगार साबित होंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button