दुर्गा पूजा से पहले कोलकाता में महिला सुरक्षा की तैयारी: ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’ को मिलेगा विशेष ड्रेस कोड और गियर

आगामी दुर्गा पूजा महोत्सव के मद्देनजर कोलकाता पुलिस ने शहर में महिला सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं। इसी महीने गठित ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’ की महिला पुलिसकर्मी अब ड्यूटी के दौरान अपनी वर्दी पर खास तौर से तैयार की गई गुलाबी और नारंगी रंग की वेस्टकोट पहनकर गश्त करेंगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उत्सव के दौरान महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
स्कूटर पर गश्त करने वाली इस विशेष टीम की सदस्यों के लिए यह नई वेस्टकोट पहनना अनिवार्य किया गया है। इस परिधान के अगले और पिछले हिस्से पर देवी दुर्गा का चेहरा और उनका त्रिशूल अंकित होगा, साथ ही अंग्रेजी भाषा में ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’ लिखा गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह नया डिजाइन दोहरे संदेश को दर्शाता है—एक तरफ संकटग्रस्त महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता और मदद का भाव, तो दूसरी तरफ महिला विरोधी अपराधों और हिंसा के मामलों में सख्त कार्रवाई का संकल्प।
इस योजना के क्रियान्वयन के लिए लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय की ओर से जरूरी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। विभाग ने लगभग 2.75 लाख रुपये की कुल लागत से 110 वेस्टकोट का ऑर्डर जारी किया है। इसके निर्माताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ये वेस्टकोट पेशेवर लुक वाली, टिकाऊ और आरामदायक होनी चाहिए, ताकि गश्त के दौरान पुलिसकर्मियों की कार्यकुशलता पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।
ड्रेस कोड के अलावा, स्क्वाड की सदस्यों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए नए हेलमेट भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कोलकाता पुलिस के लोगो वाले इन विशेष गुलाबी हेलमेटों में सुरक्षा के उच्च मानकों का पालन किया गया है। इनमें सॉफ्ट पैडिंग की कई परतें, पूरी तरह से साइड प्रोटेक्शन, चिन गार्ड और बेहतर वेंटिलेशन की सुविधा दी गई है। पुलिस प्रशासन ने करीब 1.08 लाख रुपये की लागत से ऐसे लगभग 80 हेलमेट खरीदने का ऑर्डर दिया है।
दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड मुख्य रूप से पूरे शहर में स्कूटर से गश्त कर महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करता है। इस दस्ते के संचालन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक संयुक्त गश्ती नेटवर्क की मदद ली जा रही है। इस नेटवर्क में कोलकाता के विभिन्न क्षेत्रीय पुलिस थानों, साइबर पुलिस स्टेशन, महिला पुलिस थानों और महिला सेल के कर्मियों को भी शामिल किया गया है।



