मुक्केबाजी: जैस्मीन लेम्बोरिया और प्रीति पवार ने जीते गोल्ड मेडल, भिवानी में जश्न का माहौल

भारतीय महिला मुक्केबाज जैस्मीन लेम्बोरिया ने शनिवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 57 किलोग्राम भार वर्ग स्पर्धा के खिताबी मुकाबले में नॉर्दर्न आयरलैंड की माइकेला वाल्श को 5-0 से एकतरफा शिकस्त देकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इस बड़ी उपलब्धि के बाद जैस्मीन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने काफी कड़ा अभ्यास किया था और आखिरकार उनकी यह मेहनत रंग लाई।
स्वर्ण पदक जीतने के उपरांत समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए जैस्मीन ने अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में जब वह इस मंच पर आई थीं, तब वह काफी कम उम्र की थीं और उनके पास पर्याप्त अनुभव नहीं था, जिसके चलते उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था। हालांकि, इस बार उन्होंने विशेष तैयारी की थी, जिसका सुखद परिणाम सामने आया है। उन्होंने यह भी बताया कि विरोधी मुक्केबाज राष्ट्रमंडल खेलों की पदक विजेता रह चुकी थीं, लेकिन कोच द्वारा बनाई गई सटीक रणनीति की बदौलत मुकाबला उनके पक्ष में रहा।
अपने जीवन पर फिल्म (बायोपिक) बनाए जाने की उठ रही मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए जैस्मीन ने अत्यंत सादगी का परिचय दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने सफर पर आधारित किसी भी फिल्म के निर्माण के बारे में कभी विचार नहीं किया है। उनका मानना है कि देश में कई ऐसे मुकाम हासिल करने वाले एथलीट मौजूद हैं जो इस तरह की पहचान के अधिक हकदार हैं। अन्य खिलाड़ियों से प्रेरणा लेने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान केवल अपने खेल पर केंद्रित है।
उल्लेखनीय है कि 24 वर्षीय जैस्मीन भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रही हैं। उनका खेल करियर बेहद प्रभावशाली रहा है, जिसमें उन्होंने वर्ष 2025 में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया था। इसके अतिरिक्त, वह वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में दो बार स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुकी हैं और वर्ष 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में भी उन्होंने भारत के लिए कांस्य पदक जीता था।
जैस्मीन की इस ऐतिहासिक सफलता के समाचार से उनके गृह राज्य हरियाणा के भिवानी स्थित घर पर खुशी का माहौल है। उनके पिता जयवीर लेम्बोरिया ने संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि अंतिम मुकाबले के दौरान पूरा परिवार काफी तनाव में था, किंतु जैस्मीन ने 10 वर्षों की अपनी कठिन प्रैक्टिस का सकारात्मक परिणाम देते हुए सबका सपना पूरा कर दिया। उन्होंने कहा कि स्वदेश लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा और उनकी पसंद का चूरमा बनाया जाएगा। वहीं, उनकी मां जोगेंद्र ने भी अपार गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी बेटी ने उनसे रखी गई उम्मीदों को सच कर दिखाया है तथा वह घर लौटने पर उसके लिए घी, दूध, दही और चूरमा तैयार करेंगी।
इसी प्रतियोगिता के दौरान महिलाओं के 54 किलोग्राम भार वर्ग में भारत की एक अन्य मुक्केबाज प्रीति पवार ने भी देश का मान बढ़ाया। प्रीति ने अपनी कनाडाई प्रतिद्वंद्वी स्कार्लेट सवाना डेलगाडो को 5-0 से पराजित कर स्वर्ण पदक जीता। जीत के बाद प्रीति ने आईएएनएस से अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अपनी क्षमताओं पर पूरा भरोसा था। उन्होंने बताया कि इस सफलता के बाद वे कुछ समय का ब्रेक लेंगी और उसके बाद राष्ट्रीय शिविर से जुड़कर आगामी एशियन गेम्स की तैयारियों में जुट जाएंगी।



