ईरान पर तात्कालिक हमला रोकने के ट्रंप के फैसले से सुलह के संकेत, बढ़ते तेल दामों और खाड़ी में तनाव के बीच कूटनीति पर जोर

पश्चिमी एशिया में बने तनावपूर्ण माहौल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमलों को फिलहाल टालने का निर्णय लिया है। उन्होंने निकट भविष्य में द्विपक्षीय समझौते की संभावना जताते हुए यह कदम उठाया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में बनी अनिश्चितता के बीच कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जगी है।
डोनाल्ड ट्रंप ने यह स्पष्ट किया है कि ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना अमेरिका का मुख्य उद्देश्य है। इसके बावजूद, वार्ता के जरिए किसी समझौते पर पहुंचने की गुंजाइश को देखते हुए फिलहाल नए सैन्य हमलों से बचना उचित समझा गया है। अमेरिकी प्रशासन अब इस संघर्ष को रोकने के लिए किसी स्थाई कूटनीतिक हल पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
अप्रैल में हुए युद्धविराम के पिछले महीने प्रभावी न रहने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तीव्र वृद्धि देखी गई है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की दरों में 24 फीसदी का बड़ा उछाल आया है। समाचार एजेंसी रायटर्स के सर्वेक्षण में विश्लेषकों का आकलन है कि चालू वर्ष में तेल की कीमतों में और अधिक इजाफा दर्ज किया जा सकता है।
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप का तर्क है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के राष्ट्रीय लक्ष्य के सामने ईंधन की ऊंची कीमतें सहन की जा सकती हैं, लेकिन महंगे ईंधन से पैदा हुई आर्थिक तंगी ने ट्रंप पर इस युद्ध को समाप्त करने का मार्ग तलाशने का राजनीतिक दबाव काफी बढ़ा दिया है।
ऊर्जा क्षेत्र की इस चिंता को यमन के हूती विद्रोहियों के ताजा बयानों ने और गहरा कर दिया है। ईरान के सहयोगी हूती समूह ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को निशाना बनाने की चेतावनी जारी की है। लाल सागर के मुहाने पर स्थित यह समुद्री रास्ता सऊदी अरब द्वारा किए जाने वाले कच्चे तेल के निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं शनिवार को तब और बढ़ गईं जब यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने ओमान तट के समीप दो समुद्री जहाजों से जुड़ी घटनाओं की जानकारी दी। एक घटना में संदिग्ध वस्तु टकराने से एक तेल टैंकर के इंजन कक्ष को क्षति पहुंची, जबकि दूसरी घटना में टैंकर के पास हुए विस्फोट से समुद्र में बड़ा उछाल देखा गया। हालांकि, दूसरी घटना में जहाज सुरक्षित रहा, लेकिन इन हादसों ने अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति मार्ग की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



