जंतर-मंतर कार्रवाई पर हंगामे के बीच लोकसभा 2 बजे तक स्थगित, विरोध के बावजूद विधायी कामकाज जारी

बुधवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्षी सांसदों ने लोकसभा में भारी हंगामा किया, जिसके चलते सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
विपक्षी सदस्य इस विषय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से संसद में जवाब देने की मांग पर अड़े हुए हैं। हंगामे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी सदस्यों से संसदीय नियमों का पालन करने और सदन के भीतर तख्तियां या पोस्टर न लहराने का अनुरोध किया। हालांकि, जब सांसदों की ओर से नारेबाजी और विरोध जारी रहा, तो पीठासीन अधिकारी ने कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया।
संसद के मौजूदा सत्र में विपक्षी दल विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। इन प्रमुख विषयों में 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिसिया कार्रवाई के अतिरिक्त, नीट (NEET) परीक्षा का पर्चा लीक होने का मामला और राम मंदिर चढ़ावा चोरी का प्रकरण शामिल है।
इससे पहले मंगलवार को भी विपक्षी सदस्यों के लगातार व्यवधान के कारण लोकसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई और अंततः दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई थी। वहीं, सोमवार को भारी विरोध-प्रदर्शन के बीच बिना किसी विस्तृत चर्चा के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में वृद्धि करने वाले विधेयक को पारित कर दिया गया था।
सदन में जारी गतिरोध के बीच सरकार ने विधायी कार्यों को आगे बढ़ाया। विपक्ष के विरोध के बावजूद लोकसभा ने 31 मार्च, 2023 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के अतिरिक्त व्यय के लिए भारत की संचित निधि से राशि स्वीकृत करने हेतु विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इसके साथ ही केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक चर्चा के लिए प्रस्तुत किया, जिसमें भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम 2007, आयकर अधिनियम 2025 और वित्त अधिनियम 2026 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है।
प्रस्तावित सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 मई में जारी अध्यादेश का स्थान लेगा। शीर्ष अदालत में लंबित मामलों के बढ़ते दबाव और कार्यभार को देखते हुए यह कानून लाया गया है। इसके तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश के अलावा अन्य न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी, जिससे अदालत में कुल जजों की संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी।



