ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बड़ा बयान: वैश्विक उथल-पुथल के दौर में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और बहु-स्तरीय आयात नीति को दी प्राथमिकता

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट को देखते हुए भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा नीति को मजबूत करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, देश की प्राथमिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न वैश्विक बाजारों से कच्चे तेल की खरीद की जा रही है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधानों का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर न पड़े।
मंगलवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि देश के 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा जरूरतों को बिना किसी रुकावट के पूरा करना ही हमारी ऊर्जा नीति का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की रक्षा करना ही भारत के दृष्टिकोण की नींव है और सरकार बहु-स्तरीय स्रोतों से ऊर्जा संसाधन जुटाकर इस लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रति प्रतिबद्ध है।
यह बयान अमेरिकी सीनेट द्वारा पारित उस नए कानून की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर 100 फ़ीसदी तक का टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहे हैं। पश्चिमी देशों का दावा है कि रूस से तेल की यह खरीद यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध को वित्तीय बल प्रदान करती है। अमेरिकी सीमा शुल्क के इस संभावित खतरे के सवाल पर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत और अमरीका के मध्य द्विपक्षीय व्यापार वार्ता प्रक्रियाधीन है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में अनिश्चितता और ईरान से जुड़े संघर्षों के प्रभाव से निपटने के लिए भारत ने अपनी आयात रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। भारत अब 27 के स्थान पर 41 देशों से कच्चे तेल का आयात कर रहा है। सामान्य स्थितियों में विश्व के कुल तेल एवं गैस व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होता है। इस विविधीकरण के दौरान रूस से भारत का आयात काफी बढ़ा है, जहाँ जुलाई माह में कुल भारतीय तेल आयात का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रूस से आया था।
कच्चे तेल के साथ-साथ भारत ने एलएनजी आयात के मामले में भी आत्मनिर्भरता का दायरा बढ़ाया है, जहाँ आपूर्तिकर्ता देशों की संख्या 6 से बढ़कर 15 हो गई है और अमरीका इसमें एक मुख्य भागीदार के रूप में उभरा है। चूँकि भारत अपनी ईंधन ज़रूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से मँगवाता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के दौरान अपनी आपूर्ति लाइन को सुरक्षित रखना देश के लिए अत्यंत अनिवार्य है।
इस विषय पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने संसद में कहा कि विभिन्न स्रोतों से खरीद करने से किसी एक देश या जलमार्ग पर निर्भरता खत्म होती है, जिससे भारत अचानक होने वाले वैश्विक झटकों का सामना आसानी से कर सकता है। वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आश्वासन दिया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल-गैस कंपनियों और प्रासंगिक हितधारकों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की हर गतिविधि की निरंतर निगरानी की जा रही है।



