भारत-नामीबिया व्यापार वार्ता: डिजिटल भुगतान, खनिज और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

भारत और नामीबिया के शीर्ष प्रतिनिधियों ने 10 तथा 11 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित भारत-नामीबिया संयुक्त व्यापार समिति (जेटीसी) के चौथे सत्र के दौरान द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी को नए आयाम देने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस द्विपक्षीय वार्ता का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देना, नामीबिया में स्थानीय मूल्यवर्धन को प्रोत्साहित करना और विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में सहकार्य को विस्तार देना रहा। दोनों पक्षों ने पारंपरिक व्यापारिक ढांचे में बदलाव लाते हुए एक तय समयसीमा के भीतर व्यावहारिक योजनाओं को लागू करने का संकल्प लिया।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान दोनों राष्ट्रों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 592.94 मिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जो बीते वित्त वर्ष 2024-25 के 568.40 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है। इस दौरान भारत द्वारा 349.09 मिलियन डॉलर का निर्यात और 243.85 मिलियन डॉलर का आयात किया गया। दूसरी ओर, सेवाओं के व्यापार ने भी सकारात्मक गति दिखाई और कैलेंडर वर्ष 2024 में यह 7.34 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 380 मिलियन अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया।
विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय निर्यात की स्थिति काफी मजबूत रही है। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल और वाहन घटकों के बल पर भारत का इंजीनियरिंग निर्यात 124.06 प्रतिशत उछलकर 30.24 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। इसके साथ ही, फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल डिवाइस का निर्यात 36.50 मिलियन अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया। इस आपूर्ति के साथ भारत नामीबिया के कुल दवा आयात में 16.4 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज कराकर उसका दूसरा सबसे बड़ा फार्मा आपूर्तिकर्ता बन गया है।
द्विपक्षीय संबंधों को संस्थागत रूप देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिए गए हैं। निवेश में समन्वय के लिए इन्वेस्ट इंडिया और नामीबिया के निवेश संवर्धन एवं विकास बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जिसमें दोनों ओर से एक-एक अधिकारी नामित होगा। सेवाओं में सहयोग हेतु एक विशेष कार्य समूह गठित किया जाएगा जिसकी पहली बैठक फरवरी 2027 से पूर्व होगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में संयुक्त कार्य समूह की बैठक दिसंबर 2026 तक निर्धारित है, और एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के माध्यम से जनऔषधि मॉडल लागू करने का समझौता अंतिम दौर में है। कृषि, एमएसएमई, कपड़ा, पर्यटन और खेल क्षेत्रों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण लिथियम, ग्रेफाइट, तांबा, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्वों के निष्कर्षण, खरीद और प्रसंस्कृत मूल्यवर्धन के लिए सहयोग के रास्ते तलाशे गए हैं। यह पहल नामीबिया में स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने की नीति से पूरी तरह मेल खाती है। हीरा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भारत ने नामीबिया को सूरत व मुंबई के विशेष क्षेत्रों और जेमस्टोन शो में आमंत्रित किया है तथा कटिंग, पॉलिशिंग व डिजाइनिंग में प्रशिक्षण देने की बात कही है। बुनियादी ढांचे के तहत रेलवे, सौर व पवन ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन और डिसेलिनेशन जैसे आधुनिक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।
डिजिटल मोर्चे पर 15 जून 2026 को नामीबिया में ‘WayaMe’ नाम से शुरू की गई यूपीआई आधारित भुगतान प्रणाली को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ नामीबिया के बीच फिनटेक समझौते का खाका पेश किया गया है। व्यापारिक सुगमता के लिए भारत-एसएसीयू (SACU) तरजीही व्यापार समझौते की शर्तें तय हो चुकी हैं, जिन पर 12 अगस्त 2026 को हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते पर बातचीत हस्ताक्षर के एक माह के भीतर शुरू होकर एक साल में पूरी की जाएगी। दोनों देशों के बीच पारंपरिक मैत्रीपूर्ण माहौल में आयोजित इस संस्थागत बैठक का पांचवां सत्र वर्ष 2028 में नामीबिया की मेजबानी में प्रस्तावित है।



