भारतीय नौसेना को मिला तीसरा पनडुब्बी रोधी पोत ‘मैंग्रोल’

कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) ने भारतीय नौसेना को तीसरा पनडुब्बी रोधी जलयान ‘मैंग्रोल’ (Mangrol) औपचारिक रूप से सौंप दिया है। इस पोत के शामिल होने से तटीय सुरक्षा और नौसैनिक अभियानों को नई मजबूती मिलेगी।
इस अत्याधुनिक युद्धपोत के निर्माण में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और उपकरणों का उपयोग किया गया है। पोत को संचालित करने के लिए वाटरजेट प्रणाली लगाई गई है। साथ ही, यह उन्नत रडार, सोनार, अत्याधुनिक टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेटों से पूरी तरह लैस है, जिससे इसकी मारक और खोजी क्षमता बेहद प्रभावी हो जाती है।
‘मैंग्रोल’ को विभिन्न प्रकार की सामरिक जिम्मेदारियों के लिए डिजाइन किया गया है। यह जलयान पानी के भीतर सघन निगरानी रखने, तटीय जलक्षेत्र में पनडुब्बी रोधी अभियान (एएसडब्ल्यू) चलाने, निम्न-तीव्रता वाले समुद्री अभियानों (एलआईएमओ) को अंजाम देने तथा बारूदी सुरंगों से बचाव व सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह सक्षम है।
इस जलयान का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित तटीय शहर और बंदरगाह ‘मैंग्रोल’ से लिया गया है, जो समुद्री मत्स्य पालन उद्योग के लिए एक अहम केंद्र माना जाता है। यह नामकरण भारतीय नौसेना के पूर्व माइनस्वीपर ‘आईएनएस मैंग्रोल’ की ऐतिहासिक विरासत को भी आगे बढ़ाता है, जिसने वर्ष 2004 तक अपनी सेवाएं दी थीं। इसके जरिए नौसेना की विशिष्ट युद्धपोतों के नामों को संरक्षित रखने की परंपरा भी जारी रखी गई है।
नौसेना को ‘मैंग्रोल’ की सुपुर्दगी स्वदेशी पोत निर्माण के क्षेत्र में एक अहम पड़ाव है। यह उपलब्धि केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को बल देने के साथ-साथ देश की घरेलू रक्षा विनिर्माण प्रणाली की बढ़ती दक्षता और आत्मनिर्भरता को रेखांकित करती है।



