भोपाल-देवास मार्ग पर बैरियर-मुक्त टोल प्रणाली का पायलट परीक्षण शुरू, 100 किमी/घंटा की गति पर भी स्वतः कटेगा शुल्क

मध्यप्रदेश में राजमार्गों पर आवागमन को तीव्र और निर्बाध बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा भोपाल–देवास मार्ग स्थित फंदा टोल प्लाजा पर राज्य के पहले बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम (एसएलएफएफ) का प्रायोगिक परीक्षण शुरू किया गया है। इस आधुनिक व्यवस्था के लागू होने से वाहनों को टोल नाके पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे बूम बैरियर के कारण होने वाले अनावश्यक ठहराव और यात्रियों के समय के नुकसान पर प्रभावी रोक लगेगी।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किए गए विस्तृत प्रेजेंटेशन का अवलोकन करने के उपरांत इस व्यवस्था को समय-सीमा के भीतर प्राथमिकता के साथ लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार अधोसंरचना निर्माण के साथ-साथ आधुनिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। मंत्री के अनुसार, यातायात प्रबंधन का मूल ध्येय केवल बेहतर सड़कें निर्मित करना ही नहीं, बल्कि नागरिकों को सुरक्षित, सुगम और समय की बचत कराने वाला यात्रा अनुभव प्रदान करना भी है।
तकनीकी प्रक्रिया के तहत इस लेन में हाई-रिजॉल्यूशन एएनपीआर (ANPR) कैमरे, फास्टैग/आरएफआईडी रीडर, वाहन वर्गीकरण सेंसर, लेन कंट्रोलर तथा ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं। वाहन लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरते हुए भी बिना रुके टोल सीमा को पार कर सकेगा। उपकरण वाहन के गुजरते ही उसकी श्रेणी का निर्धारण कर फास्टैग खाते से निर्धारित शुल्क की कटौती कर लेंगे।
फास्टैग से संबंधित तकनीकी त्रुटियों या बैलेंस की कमी से निपटने के लिए ई-चालान का प्रावधान किया गया है। यदि किसी कारणवश वाहन का टोल शुल्क तत्काल नहीं कट पाता है अथवा गलत पंजीकरण जैसी खामी पाई जाती है, तो वाहन स्वामी को ई-चालान भेजा जाएगा। निर्धारित 3 दिनों की समय-सीमा के भीतर राशि का भुगतान न किए जाने पर नियमानुसार जुर्माने सहित वसूली की कार्यवाही की जाएगी।
वर्तमान में फंदा प्लाजा की एक लेन में चल रहे इस परीक्षण के परिणामों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। परीक्षण सफल रहने की दशा में 1 जनवरी 2027 से भोपाल–देवास मार्ग के सभी तीनों टोल प्लाजा की प्रत्येक लेन में इस व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू करने की योजना है। इसके पश्चात प्राप्त अनुभवों के आधार पर राज्य के अन्य प्रमुख टोल नाकों पर भी बैरियर-लेस व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा।



