ड्रग्स नेटवर्क पर चौतरफा प्रहार: 2029 तक भारत को नशामुक्त करने का लक्ष्य, पणजी में बोले गृह मंत्री अमित शाह

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2029 तक देश को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। गोवा की राजधानी पणजी में रविवार को नारकोटिक्स नियंत्रण विषय पर आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने यह बात कही। कार्यक्रम में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की उपस्थिति के बीच गृह मंत्री ने कहा कि जिस प्रकार नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता प्राप्त की गई है, उसी प्रतिबद्धता से ड्रग्स की समस्या को भी जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा।
शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुख्य अंग बनाया है। वर्ष 2014 से पूर्व यह प्रयास बिखरे हुए और सीमित थे, जिन्हें अब एक राष्ट्रव्यापी, सतत और समन्वित मुहिम में परिवर्तित कर दिया गया है। जांच का दायरा केवल जब्ती तक सीमित न रखकर अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोहों और उनके आर्थिक आधार को समाप्त करने पर केंद्रित है। नारकोटिक्स के जरिए पोषित होने वाले वैश्विक नार्को-टेरर गठजोड़ को देश के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए उन्होंने कहा कि नेटवर्क के खात्मे के साथ-साथ पीड़ितों के समुचित उपचार और सामाजिक पुनर्वास पर समान बल दिया जा रहा है।
आंकड़ों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करते हुए गृह मंत्री ने बताया कि 2004-2014 के दशक में करीब 40 हजार करोड़ रुपये की 26 लाख किलोग्राम नशीली सामग्री पकड़ी गई थी, जबकि 2014 से 2026 की अवधि में यह आंकड़ा 1.89 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 1 करोड़ 19 लाख किलोग्राम से अधिक दर्ज किया गया। नष्ट किए गए मादक द्रव्यों की मात्रा भी 3.36 लाख किलोग्राम से बढ़कर 48.68 लाख किलोग्राम हो गई। जांच प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए 2019 से एनकॉर्ड व्यवस्था, राज्य एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स, NIDAAN पोर्टल और CCTNS आधारित डिजिटल मैपिंग लागू की गई है। इसके अतिरिक्त, डार्क नेट, क्रिप्टो करेंसी और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों की तकनीकी निगरानी के लिए विशेष जांच प्रकोष्ठ कार्य कर रहे हैं।
सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को तोड़ने के लिए एजेंसियां अब दोतरफा पड़ताल कर रही हैं। किसी भी स्थानीय बरामदगी से उसके मुख्य सप्लायर तक और सीमावर्ती क्षेत्रों में पकड़े जाने वाले स्टॉक से उसके अंतिम वितरण तंत्र तक कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक के लिए लागू तीन वर्षीय मिशन मोड कार्ययोजना में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए त्रैमासिक समीक्षा का प्रावधान किया गया है। यह योजना इंटेलिजेंस, सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण, मांग में कमी और अंतर-एजेंसी समन्वय जैसे चार स्तंभों तथा 200 से अधिक एक्शन पॉइंट्स पर संचालित हो रही है।
तस्करी के संवेदनशील मार्गों ‘डेथ क्रिसेंट’ और ‘डेथ ट्राएंगल’ पर निगरानी के लिए सीमा सुरक्षा बल, सीआईएसएफ, तटरक्षक बल और डीआरआई को आधुनिक उपकरणों से लैस किया गया है। शाह ने स्पष्ट किया कि भारत में विदेशी नागरिकों का स्वागत है, लेकिन मादक द्रव्यों के साथ नहीं। वित्तीय कड़ियों की पड़ताल ईडी और वित्तीय आसूचना इकाई कर रही हैं, जबकि सीबीआई और इंटरपोल के सहयोग से 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से 274 भगोड़ों को भारत लाया गया है। 14 से अधिक केंद्रीय एजेंसियों से जुड़ी ‘भारतपोल’ प्रणाली और नए कानूनों के तहत भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
जन-भागीदारी का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने बताया कि 25 करोड़ लोगों को नशामुक्ति से जोड़ा जा चुका है और 5.70 लाख व्यक्तियों का उपचार पूरा हुआ है। नशामुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 1,751 की जा रही है और मार्च 2027 तक राज्यों में सुसज्जित टास्क फोर्स तैयार करने हेतु 7 प्रतिशत केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाएगी। शिक्षा, खेल और युवा मंत्रालय मिलकर शैक्षणिक परिसरों को पूरी तरह ड्रग्स-फ्री बनाने में जुटे हैं, ताकि वर्ष 2047 के विकसित भारत के संकल्प को सशक्त और नशामुक्त युवा शक्ति के बल पर साकार किया जा सके।



