शेयर बाज़ार अपडेट

घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को कारोबारी सत्र की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सुबह 9:22 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 533 अंक यानी 0.71 प्रतिशत का गोता लगाकर 75,044 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 135 अंक अथवा 0.57 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज करते हुए 23,498 अंक पर कारोबार कर रहा था।

शुरुआती सत्र में बाजार पर मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और सेवा (सर्विसेज) क्षेत्र के शेयरों की बिकवाली का दबाव देखा गया। सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी आईटी और निफ्टी सर्विसेज सबसे ज्यादा टूटने वाले सूचकांकों में शामिल रहे। इसके साथ ही फाइनेंशियल सर्विसेज, रियल्टी, ऑटो, पीएसयू बैंक, प्राइवेट बैंक, एफएमसीजी, मीडिया, कंजम्पशन, ऑयल एंड गैस और इंडिया मैन्युफैक्चरिंग जैसे अन्य सेक्टोरल सूचकांक भी नुकसान के साथ लाल निशान में कारोबार करते दिखे। दूसरी तरफ, एनर्जी, हेल्थकेयर, पीएसई, फार्मा, मेटल और कमोडिटीज सेक्टर में खरीदारी रहने से ये सूचकांक बढ़त के साथ हरे निशान में टिके रहे।

सेंसेक्स की कंपनियों में चुनिंदा दिग्गज शेयर बढ़त दर्ज करने में सफल रहे, जिनमें एलएंडटी, एनटीपीसी, सन फार्मा, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स और कोटक महिंद्रा बैंक प्रमुख गेनर्स रहे। इसके उलट एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टीसीएस, एचयूएल, एमएंडएम, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल, एसबीआई, एक्सिस बैंक, आईटीसी, टाइटन, मारुति सुजुकी और एशियन पेंट्स के शेयरों में बिकवाली हावी रही और वे नुकसान के साथ कारोबार कर रहे थे।

अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख दर्ज किया गया। टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक और सोल के शेयर बाजार मजबूती के साथ हरे निशान में कारोबार करते नजर आए, जबकि जकार्ता के बाजार में नरमी रही और यह लाल निशान में रहा। इससे पहले बीते कारोबारी सत्र में मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार गिरावट पर बंद हुए थे, जहां डाओ जोन्स में 1.18 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.32 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई थी।

विश्लेषकों के अनुसार, वर्तमान में इक्विटी मार्केट दोहरी चुनौतियों से जूझ रहा है। पहला कारण अमेरिका और ईरान के बीच गहराते भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड का लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच जाना है, जो अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा रहा है। वहीं दूसरी बड़ी चुनौती तेजी से बढ़ता आईपीओ बाजार है, जिसके कारण सेकेंडरी मार्केट से लिक्विडिटी कम हो रही है और निफ्टी में लगातार गिरावट का दबाव बन रहा है। अनुमान है कि लिक्विडिटी की यह कमी कच्चे तेल के उछाल की तुलना में बाजार पर अधिक गहरा असर डाल रही है।

प्राथमिक बाजार (आईपीओ) से मिलने वाला लिस्टिंग गेन बढ़कर करीब 22 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जिसके चलते खुदरा और संस्थागत दोनों श्रेणियों के निवेशक भारी संख्या में आईपीओ का रुख कर रहे हैं। इस बदलाव की एक बड़ी वजह यह भी है कि चालू वर्ष में अब तक निफ्टी का कुल रिटर्न -9.5 प्रतिशत रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख भी इसी ओर इशारा करता है; एफआईआई ने इस साल अब तक शेयर बाजारों में 2,84,000 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की है, जबकि इसी अवधि में उन्होंने आईपीओ बाजार में लगभग 36,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

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