यूएनजीए में बोले एस. जयशंकर: आतंकवाद पर भारत उठाएगा आत्मरक्षा के कदम, प्रायोजकों की जवाबदेही तय करना जरूरी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में कड़े शब्दों में कहा कि भारत आतंकवाद के मुकाबले में अपनी आत्मरक्षा के अधिकार का पूर्ण इस्तेमाल करेगा। आम बहस के दौरान उन्होंने एक अनाम देश पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय से आतंकी गतिविधियों को संचालित करने वाले तत्वों ने इस प्रतिष्ठित वैश्विक पटल पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का प्रयास किया है।
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को आम चलन का हिस्सा बताने और उसके दुष्परिणामों से बचने के लिए दिए जा रहे कुतर्कों को कतई मान्यता नहीं दी जा सकती। उन्होंने सीमा पार राज्य-प्रायोजित आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। विदेश मंत्री के अनुसार, ऐसी कार्यप्रणाली चलाने वाली सरकारों को जवाबदेह बनाना आवश्यक है और आतंक के वित्तपोषण को उजागर कर उस पर नकेल कसी जानी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि मित्रता और आतंकवाद कभी एक साथ नहीं चल सकते, इसलिए आतंकी साजिशकर्ताओं को अपनी कार्यशैली बदलनी ही होगी।
आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ के संकल्प को दोहराते हुए उन्होंने यह बात वैश्विक शांति, जनकल्याण और विकासशील देशों की प्राथमिकताओं पर दिए गए अपने भाषण के दौरान कही। उन्होंने दुनिया भर में आपूर्ति श्रृंखला, वित्त, बाजार पहुंच और उन्नत तकनीक के बढ़ते ‘हथियारीकरण’ पर गहरी चिंता व्यक्त की। जयशंकर ने कहा कि इस प्रवृत्ति से निपटने के लिए विभिन्न देश अपने रिश्तों में विविधता लाकर जोखिम घटाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसका सीधा असर आपसी विश्वास और सहयोग के माहौल पर पड़ रहा है।
संबोधन में उन्होंने विकासशील देशों के सामने खड़े ‘4F’ संकट का विशेष उल्लेख किया, जिसमें भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्तीय सुरक्षा की चुनौतियां शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सुपर एल नीनो, खाद की अनुपलब्धता और अनाजों की आवाजाही में रुकावटें दुनिया के लिए चिंता का सबब बनी हुई हैं। साथ ही, गैर-बाजारवादी नियम और व्यापारिक बाधाएं विकासशील देशों की औद्योगिकीकरण की गति को धीमा कर रही हैं।
घरेलू प्रगति का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की सतत प्रगति और लोक-कल्याणकारी योजनाओं ने विश्व की कुल आबादी के छठे हिस्से का जीवन स्तर सुधारा है। डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से आर्थिक व सामाजिक लाभ आम जनता तक पहुंचाने के भारतीय मॉडल को उन्होंने रेखांकित किया और बताया कि भारत यह ज्ञान अपने अंतरराष्ट्रीय मित्रों के साथ साझा कर रहा है।
विकास साझेदारी के तहत भारत वर्तमान में 78 देशों में 600 से अधिक बड़ी विकास योजनाओं पर कार्य कर रहा है, जो इन्फ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, आईटी और क्षमता विकास से जुड़ी हैं। इन कार्यक्रमों में अफ्रीकी देशों और छोटे द्वीपीय विकासशील राष्ट्रों को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि चाहे युद्ध क्षेत्र हों या महामारी व आपदाएं, भारत ने सदैव आवश्यक चिकित्सा सामग्री पहुंचाई है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण नेपाल की विनाशकारी बाढ़ और वेनेजुएला के भूकंप के दौरान भारत द्वारा भेजी गई त्वरित सहायता है।



