अहमदाबाद: गृह मंत्री अमित शाह ने साबरमती से देश की पहली एलएनजी ट्रेन को दिखाई हरी झंडी, 1,472 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं का तोहफा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती रेलवे स्टेशन से देश की पहली एलएनजी (तरल प्राकृतिक गैस) चालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, संरक्षा और यात्री सुविधाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से साबरमती मंडल में 1,472 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया।

समारोह को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने साबरमती के ऐतिहासिक महत्व का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि यह वही पावन भूमि है जहां से महात्मा गांधी ने अपने आश्रम के जरिए स्वाधीनता संग्राम का मार्गदर्शन किया था। यहीं से बापू ने सत्याग्रह, सादगी, खादी और ग्राम स्वराज जैसे राष्ट्रीय सिद्धांतों को व्यवहार में उतारा। साबरमती स्टेशन के कायाकल्प की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में यहां यात्रियों को रिक्शा तक पहुंचने के लिए लगभग दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था, जबकि आज यह परिसर आधुनिक सुविधाओं, मेट्रो कनेक्टिविटी, बस टर्मिनल और भविष्य की हाई-स्पीड रेल से जुड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हो चुका है।

गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे तीव्र आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही है। प्रीमियम स्टेशनों, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और रैपिड रेल के बाद अब हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक से भारत दुनिया के चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो चुका है। उन्होंने बताया कि घरेलू स्तर पर निर्मित इंजनों में लगभग 94 प्रतिशत घटक ‘मेक इन इंडिया’ के तहत तैयार हो रहे हैं और जल्द ही इसे 100 प्रतिशत स्वदेशी बनाने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और साबरमती रेल मंडल की टीम के प्रयासों की भी सराहना की।

माल परिवहन में आए सुधारों का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने कहा कि 1,200 हॉर्सपावर क्षमता वाले ट्विन-सेक्शन डब्ल्यूएजी-12 इंजन से रेलवे ने नई उपलब्धि हासिल की है। पहले जिस भार को खींचने के लिए दो इंजनों की आवश्यकता पड़ती थी, अब यह अकेला इंजन करीब 600 ट्रकों के बराबर माल ढोने में सक्षम है। उन्होंने बताया कि देश में डबल डेकर मालगाड़ियों के ट्रायल चल रहे हैं और यातायात को सुगम बनाने के लिए दिल्ली-हावड़ा तथा दिल्ली-गुवाहाटी के बीच लगभग 11,000 किलोमीटर के रेल कॉरिडोर को चार पटरियों वाले नेटवर्क में तब्दील करने का कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले ऐसी बड़ी परियोजनाओं की गति रुकी हुई थी।

पर्यावरण और ऊर्जा दक्षता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश में 99.6 प्रतिशत रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण संपन्न हो चुका है और शेष कार्य भी शीघ्र पूरा होगा। उन्होंने चीन, स्पेन, फ्रांस और ब्रिटेन के आंकड़ों का संदर्भ देते हुए बताया कि भारत में डीजल की खपत में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2015-16 में जहां रेलवे 293 करोड़ लीटर डीजल का उपयोग करता था, वहीं 2024-25 में यह घटकर 108 करोड़ लीटर रह गया है। केंद्र सरकार का संकल्प है कि 2030 तक रेलवे में डीजल की खपत को पूरी तरह समाप्त कर शून्य पर लाया जाए, जिससे बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।

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