सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा ने ‘ऑपरेशन दृष्टि’ के तहत कश्मीर में कीं 364 नेत्र सर्जरी, अगला पड़ाव ओडिशा

सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (एएफएमएस) ने ‘ऑपरेशन दृष्टि’ अभियान के अंतर्गत कश्मीर घाटी में दो विशेष शिविर लगाकर कुल 364 मरीजों की आंखों के सफल ऑपरेशन किए। श्रीनगर स्थित 92 बेस अस्पताल में 30 सितंबर, 2026 को 11वें विशाल शिविर के समापन के साथ ही इस मानवीय पहल का कश्मीर चरण पूरा हो गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती व दुर्गम क्षेत्रों के निवासियों को उनके घर के समीप ही आंखों की आधुनिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना था, ताकि उन्हें जटिल उपचार के लिए बड़े शहरों का रुख न करना पड़े।
शल्य चिकित्सा की इस पूरी प्रक्रिया का संचालन आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल (एएचआरआर) की टीम ने ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा की अगुवाई में किया। दोनों शिविरों में मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, टेरिजियम तथा रेटिना से जुड़े गंभीर विकारों का समुचित उपचार किया गया। मुख्य शिविरों के आयोजन से पहले 92 बेस अस्पताल और 328 फील्ड अस्पताल के संयुक्त प्रयासों से घाटी के दूरदराज इलाकों में 18 जांच शिविर लगाए गए थे। तंगधार, दावर, माछिल, उरी, बारामूला, बांदीपोरा, खानाबल और कंगन जैसे सीमांत क्षेत्रों में लगभग 6,000 नागरिकों की जांच हुई, जिनमें से करीब 500 लोगों को ऑपरेशन के लिए चिह्नित किया गया।
चिह्नित मरीजों के उपचार का प्रथम चरण नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे संवेदनशील इलाके तंगधार में शुरू किया गया। वहां 24 और 25 सितंबर, 2026 को एक भूमिगत ऑपरेशन थिएटर के भीतर बड़े स्तर पर शल्य चिकित्सा सत्र चला, जिसमें डॉक्टरों ने दो दिनों के दौरान 220 मरीजों की आंखों की रोशनी सफलतापूर्वक लौटाई। इस आयोजन ने यह साबित किया कि सैन्य चिकित्सा दल विषम भौगोलिक और सुरक्षा चुनौतियों के बीच भी उच्च स्तरीय चिकित्सा देने में सक्षम हैं।
इसके उपरांत दूसरा चरण श्रीनगर के 92 बेस अस्पताल में 28 व 29 सितंबर, 2026 को संपन्न हुआ, जहां 144 मरीजों के ऑपरेशन किए गए। इस दौरान मोतियाबिंद के सामान्य मामलों के साथ-साथ ग्लूड इंट्राओकुलर लेंस (आईओएल) प्रत्यारोपण, ग्लूकोमा, टेरिजियम और डायबिटिक रेटिनोपैथी से संबंधित जटिल सर्जरी भी की गईं। दृष्टि दोष से जूझ रहे कई मरीजों को प्रक्रिया के अगले ही दिन से स्पष्ट दिखाई देने लगा।
समापन समारोह में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा मुख्य रूप से मौजूद रहे। उन्होंने घाटी के आम नागरिकों के प्रति सेना के डॉक्टरों के सेवाभाव, तकनीकी दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। इस मौके पर 15 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह सहित सेना के कई उच्चाधिकारी भी उपस्थित थे। देश के उत्तरी, पश्चिमी, पूर्वी और मध्य भागों तक अपनी सेवाएं पहुंचाने के बाद अब यह अभियान अपने अगले चरण में ओडिशा राज्य का रुख करेगा।



