आरबीआई ने रेपो दर बढ़ाकर 5.50% की, वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई 5.2% रहने का जताया अनुमान

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा बैठक के बाद नीतिगत रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने निर्णयों की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में नीतिगत ब्याज दरों का पुनर्संतुलन करना अनिवार्य हो गया था।
केंद्रीय बैंक के आकलन के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में खुदरा महंगाई 4.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6 प्रतिशत तथा चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत के स्तर पर रह सकती है। वहीं, अगले वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही में इसके 5.6 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है। इसके अतिरिक्त, चालू वित्त वर्ष के दौरान कोर मुद्रास्फीति का अनुमान 4.4 प्रतिशत पर निर्धारित किया गया है।
हालिया मूल्य प्रवृत्तियों की जानकारी देते हुए गवर्नर ने बताया कि अगस्त माह में सीपीआई मुद्रास्फीति 4.5 प्रतिशत से बढ़कर 4.8 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण खाद्य और ईंधन की दरों में आई तेजी रहा। इस दौरान कोर मुद्रास्फीति में भी इजाफा देखा गया है, जो यह दर्शाता है कि कीमतों में वृद्धि का असर अब केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित न रहकर समूची अर्थव्यवस्था में विस्तृत होने लगा है। अगस्त में कोर मुद्रास्फीति 4.2 प्रतिशत रही, जबकि कीमती धातुओं को अलग रखने पर यह आंकड़ा 2.9 प्रतिशत दर्ज किया गया।
आरबीआई के अनुसार, खाद्य वस्तुओं में मूल्य वृद्धि का दबाव व्यापक हुआ है, जिसमें विशेषकर चीनी और प्याज के दामों में तीव्र वृद्धि शामिल है। वहीं दूसरी ओर, अगस्त में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे प्रतिकूल आधार प्रभाव (बेस इफेक्ट) ने भी भूमिका निभाई। खुदरा बास्केट की 4 प्रतिशत से अधिक मुद्रास्फीति वाली वस्तुओं का अनुपात निरंतर बढ़ते हुए अगस्त में करीब 37 प्रतिशत तक जा पहुंचा, जो महंगाई के बढ़ते दायरे की पुष्टि करता है।
आगामी चुनौतियों को रेखांकित करते हुए गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि मुद्रास्फीति और उसका परिदृश्य अब पिछले साल जितना अनुकूल नहीं बचा है। आने वाली तीन तिमाहियों में औसत सीपीआई महंगाई लगभग 5.8 प्रतिशत और कोर मुद्रास्फीति करीब 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। केंद्रीय बैंक ने आगाह किया कि कमजोर मानसून, जारी अल नीनो प्रभाव, ऊर्जा की ऊंची लागत और अन्य अंतरराष्ट्रीय जिंसों की कीमतों में मजबूती आने वाले महीनों में आपूर्ति पक्ष पर निरंतर दबाव बनाए रख सकती है।



