ईरान के साथ संघर्ष विराम के लिए परमाणु हथियारों पर स्थायी रोक जरूरी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

जॉइंट बेस एंड्रयूज पर हाल ही में मीडिया से रूबरू हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार न बनाने का पक्का आश्वासन दे, तो अमेरिका वहां अपने सैन्य अभियानों को तुरंत रोकने के लिए तैयार है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी बलों की वापसी तभी संभव है जब यह पूरी तरह सुनिश्चित हो जाए कि वहां से परमाणु प्रसार का अंदेशा हमेशा के लिए खत्म हो चुका है। उन्होंने चिंता जताई कि किसी अधकचरी व्यवस्था के कारण अमेरिका को कुछ वर्षों के अंतराल के बाद पुनः उसी खतरे के समाधान हेतु सैन्य हस्तक्षेप के लिए विवश न होना पड़े।
अमेरिकी प्रशासन की रणनीति का खुलासा करते हुए राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन की प्राथमिकता केवल तात्कालिक तनाव को खत्म करना नहीं, बल्कि ईरान के परमाणु ढाँचे को इस तरह निष्प्रभावी करना है कि वह भविष्य में संहारक हथियार बनाने की स्थिति में ही न रहे। हाल ही में टेनेसी के क्लार्क्सविल में दिए अपने एक व्याख्यान में भी उन्होंने इस अभियान को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया था। ट्रंप ने याद दिलाया कि अमेरिकी सेना बीते सात महीनों से इस संघर्ष में उलझी हुई है, और उन्होंने इसकी प्रकृति की तुलना वियतनाम और अफगानिस्तान जैसे ऐतिहासिक रूप से लंबे चले अमेरिकी युद्धों से की।
सैन्य हताहतों पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि इस अभियान में जहां कई अमेरिकी सैनिक जख्मी हुए हैं, वहीं अब तक 18 जवानों ने अपनी जान गंवाई है। उन्होंने सैनिकों के इस योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि इन्हीं कठोर कदमों के चलते ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोका जा सका। राष्ट्रपति ने डोवर एयर फोर्स बेस पर शहीद सैनिकों के परिवारों से हुई अपनी भेंट का संस्मरण साझा करते हुए इसे शीर्ष पद की सबसे चुनौतीपूर्ण और भावुक जिम्मेदारी बताया, साथ ही कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए इन सैनिकों ने अत्यंत भारी कीमत चुकाई है।
ईरान को हुए सामरिक नुकसान का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी वायु और नौसैनिक प्रहारों ने ईरान की पारंपरिक सुरक्षा प्रणाली को गहरा नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप के अनुसार, इस कार्रवाई के अंतर्गत ईरान की जलसेना, वायुसेना, रडार नेटवर्क और कई प्रमुख सैन्य निर्माण इकाइयों को तबाह कर दिया गया है। इन सुनियोजित हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरान की सामरिक ताकत की रीढ़ को तोड़ना था, ताकि वह आने वाले समय में अपने रक्षा और परमाणु तंत्र को दोबारा आसानी से पुनर्जीवित न कर सके।
संघर्ष के कूटनीतिक और आर्थिक पहलुओं का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी उम्मीद जताई कि यह सैन्य गतिरोध निकट भविष्य में शांत हो सकता है। उन्होंने कहा कि संघर्ष समाप्ति से वैश्विक तेल बाजार को बड़ी राहत मिलेगी, जो खाड़ी क्षेत्र में उपजे तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान के कारण लगातार दबाव में रहा है। ट्रंप का यह रुख स्पष्ट करता है कि ऊर्जा बाजार के स्थायित्व की संभावनाओं के बावजूद, शांति बहाली का रास्ता पूरी तरह से ईरान द्वारा परमाणु कार्यक्रम के स्थायी त्याग पर ही निर्भर करेगा।



