युवाओं की प्रतिभा और आत्मविश्वास के बल पर तय होगा वैश्विक भविष्य: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवरात्रि के पहले दिन चेन्नई स्थित जयगोपाल गारोडिया हिंदू विद्यालय के 50 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित स्वर्ण जयंती कार्यक्रम को संबोधित किया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में आज अवसरों की कोई कमी नहीं है और देश का युवा वर्ग अपनी नवाचार क्षमता से विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने को तत्पर है। विद्यार्थियों के उत्साह और सकारात्मक दृष्टिकोण को भारत का उज्ज्वल भविष्य करार देते हुए प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर विलंब से पहुंचने को लेकर विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों से खेद भी व्यक्त किया।
विश्व हिंदू विद्या केंद्र और विद्यालय परिवार को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने संस्थान के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1975 में वेस्ट माम्बलम में बिना किसी स्थायी भवन और महज सात विद्यार्थियों के साथ इस यात्रा की शुरुआत हुई थी, जो आज सेवा भाव और निष्ठा के दम पर राज्य भर में 15 संस्थानों के विशाल नेटवर्क में बदल चुकी है। उन्होंने विद्यालय के निर्माण में जयगोपाल गारोडिया की भूमिका और सभी सहयोगियों के योगदान को सराहा। इसके साथ ही, उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा रोजाना एक रुपये संचित कर सैनिकों के कल्याण के लिए 40 लाख रुपये एकत्र करने की गिरिजा शेषाद्रि की पहल का विशेष उल्लेख किया और सेवा तथा स्वच्छता के संस्कारों को जीवन में आत्मसात करने पर बल दिया।
सांस्कृतिक चेतना पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी संस्करण भेंट किया था। उन्होंने कहा कि संत तिरुवल्लुवर की शिक्षाएं हमें बताती हैं कि ज्ञान केवल अर्जित करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में क्रियान्वित करने के लिए होता है। महाकवि भारतियार के काशी से जुड़े विचारों और उनकी कालजयी रचना ‘अच्चमिल्लै, अच्चमिल्लै’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने युवाओं को निडर होकर नए विचार आजमाने की सलाह दी। 1990 के दशक की अपनी एकता यात्रा के दिनों का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने छात्रों से आग्रह किया कि वे पूरे देश का भ्रमण करें, अंतर-सांस्कृतिक मित्रता बढ़ाएं और तमिल भाषा, काव्य व परंपराओं की महक को देश के हर कोने तक ले जाएं।
शैक्षणिक सुधारों का ब्योरा देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले दशक में शिक्षा का ढांचा अभूतपूर्व रूप से सुदृढ़ हुआ है। विश्वविद्यालयों की संख्या 750 से बढ़कर 1,300 से अधिक और कॉलेजों की संख्या 38,000 से बढ़कर 52,000 से ऊपर पहुंच गई है, साथ ही शीर्ष संस्थानों का तीव्र विस्तार हुआ है। नई शिक्षा नीति के सकारात्मक परिणामों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय क्यूएस रैंकिंग में भारत के शिक्षण संस्थानों की संख्या 2015 के 14 से बढ़कर अब 52 पर आ गई है। उन्होंने यह भी कहा कि खेलों में प्रतिभाओं को निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे भारत 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 के ओलंपिक गेम्स की मेजबानी के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ सके।
संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को दोहराया। उन्होंने देश को विश्व की तीन शीर्ष आर्थिक महाशक्तियों में स्थापित करने, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण, वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरने और भारतीय नागरिक को चंद्रमा पर पहुंचाने के लक्ष्यों को रेखांकित किया। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे पूर्ण आत्मविश्वास के साथ बड़े लक्ष्य निर्धारित करें और विकसित तमिलनाडु तथा विकसित भारत के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दें।



