विकास साझेदारी भारत की विदेश नीति का मुख्य आधार: संयुक्त राष्ट्र में सांसद संगीता सिंह देव

संयुक्त राष्ट्र में भारतीय संसदीय दल का नेतृत्व कर रहीं ओडिशा के बलांगीर से लोकसभा सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने गुरुवार को ‘इंडिया-यूएन फंड’ के वार्षिक सम्मेलन-2026 में कहा कि विकास कार्यों में वैश्विक साझेदारी भारत की विदेश नीति का एक अहम आधार स्तंभ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोष ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के साथ भारत के व्यापक संबंधों का विस्तार है। यह साझेदारी बहुपक्षीय व्यवस्था के तहत रियायती वित्तीय मदद, बुनियादी ढांचे के निर्माण, मानवीय सहायता, क्षमता संवर्धन, डिजिटल कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण जैसे क्षेत्रों में काम करती है। कार्यक्रम में प्रशांत महासागरीय क्षेत्र, दक्षिण-पूर्व एशिया, यूरोप, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के राजनयिकों ने भारत के सहयोग की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
सांसद संगीता सिंह देव ने रेखांकित किया कि वर्ष 2017 में 150 मिलियन डॉलर के कोष से शुरू की गई यह पहल यह साबित करती है कि दक्षिण-दक्षिण सहयोग किस प्रकार स्थानीय स्तर पर समाधान खोजकर संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को गति दे सकता है। भारत द्वारा प्रायोजित कार्यक्रमों की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमारी नीति सहायता पाने वाले देशों की स्वायत्तता और प्राथमिकताओं का पूरा आदर करती है। हमारी कार्यशैली संबंधित राष्ट्रों की मांग, विचार-विमर्श, पारस्परिक लाभ, संप्रभुता और सम्मान के सिद्धांतों से संचालित होती है। साझेदार देश अपनी जरूरतें तय करते हैं और भारत उन योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए उनके साथ मिलकर कार्य करता है।
संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव हाओ लियांग जू ने बताया कि ‘इंडिया-यूएन डेवलपमेंट पार्टनरशिप फंड’ अब तक 64 देशों की 94 विकास परियोजनाओं में मददगार रहा है। यह मंच भारत की वित्तीय क्षमता और उसके विकासात्मक अनुभव को जरूरतमंद देशों की प्राथमिकताओं के साथ जोड़कर दक्षिण-दक्षिण सहयोग का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करता है। बुर्किना फासो के अपने हालिया दौरे का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत की मदद से वहां न्यांडो बांध, सिंचाई सुविधाएं, महिला सहकारी समितियां, मत्स्य पालन और शिक्षण संस्थानों के सुधार जैसे कार्य संभव हुए हैं, जिनसे 50 हजार से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की सहायता ने वास्तव में आम जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि भारत की विकास साझेदारी का दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ यानी ‘संपूर्ण विश्व एक परिवार है’ के प्राचीन विचार से प्रेरित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जब विकासशील देश अपने अनुभव साझा करते हैं और मिलकर क्षमता निर्माण करते हैं, तो विकास अधिक टिकाऊ और समावेशी बनता है।
इस अवसर पर विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भारत के प्रति आभार व्यक्त किया। तुवालु के स्थायी प्रतिनिधि तपुगाओ फलेफौ ने इसे अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि फुनाओटा समुदाय में सोलर होम स्टैंडअलोन सिस्टम से लोगों को निरंतर स्वच्छ ऊर्जा मिल रही है। श्रीलंका के राजदूत जयंता जयसूर्या ने 2022 के आर्थिक संकट में एक अरब डॉलर की क्रेडिट लाइन और चक्रवात डिटा के समय ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ के जरिए महज 24 घंटे में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए भारत का आभार माना।
मोल्दोवा के प्रतिनिधि घोरघे लेउका ने ‘साउथ-लेड सॉल्यूशंस: शेयर्ड रिजल्ट्स’ विषय की सराहना करते हुए कहा कि उनके देश के सांख्यिकी ब्यूरो को जनसंख्या और प्रवासन डेटा तैयार करने में तकनीकी मदद मिली। वहीं, तंजानिया के तोगोलानी एड्रिस मावोरा ने जलवायु अनुकूलन कार्यक्रम को समयोचित बताया। क्यूबा के प्रतिनिधि अर्नेस्टो सोबेरॉन गुज़मैन ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटाने में भारत की मदद को सराहा, जबकि पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के निदेशक जारबाज़ बारबोसा ने पैराग्वे के निवाक्ले समुदाय में स्वास्थ्य सेवाओं के जमीनी असर का उल्लेख किया। सम्मेलन में सभी देशों ने माना कि आपदा प्रबंधन, जलवायु सुधार और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत का योगदान सराहनीय रहा है।



