विश्व व्यवस्था में समावेशी सुधार और आत्मनिर्भरता पर जोर: भारत वैश्विक कल्याण के लिए अपनी क्षमता बढ़ा रहा — प्रधानमंत्री

नई दिल्ली में गुरुवार को आयोजित एक निजी कार्यक्रम ‘वर्ल्ड समिट 2026’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नीति-निर्माताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की आर्थिक और तकनीकी प्रगति पूरे विश्व के कल्याण से जुड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक मजबूत, आत्मनिर्भर और कुशल भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त बनाकर विश्व समृद्धि में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में आ रहे बदलाव आज हर व्यक्ति के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विमर्श की उपयोगिता और बढ़ गई है। उन्होंने रेखांकित किया कि बीते दशकों में नई तकनीकों और अर्थव्यवस्थाओं के विस्तार के अनुरूप वैश्विक संस्थाएं स्वयं को ढालने में असमर्थ रही हैं। जो साधन पहले देशों को आपस में जोड़ने के लिए जाने जाते थे, वे आज प्रतिस्पर्धा और संघर्ष के बिंदु बन चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2020 में जी-20 और संयुक्त राष्ट्र में उठाए गए मानवता-केंद्रित व्यवस्था और संस्थागत बदलावों के अपने आह्वान को दोहराते हुए कहा कि यदि समय बदलने पर व्यवस्थाएं नहीं बदलीं, तो सुधार की गति धीमी पड़ जाती है।
‘पावर टू एम्पावर’ के दृष्टिकोण को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत बहुपक्षीय मंचों पर सर्वसम्मति कायम करने वाले सेतु की भूमिका निभा रहा है। महामारी के कठिन दौर में वैश्विक स्तर पर 100 से अधिक राष्ट्रों को जीवनरक्षक टीके और दवाइयां पहुंचाकर देश ने सहयोग की मिसाल पेश की। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी ऐसी कमजोर व्यवस्था का विरोध करता है जो ‘मत्स्य न्याय’ यानी बड़ी मछली द्वारा छोटी मछली को निगलने की स्थिति को जन्म दे, और इसके स्थान पर संकट के समय भी प्रभावी रहने वाली समावेशी व्यवस्था का समर्थन करता है।
देश के भीतर आर्थिक और ढांचागत प्रगति का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भी भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश ने 300 गीगावाट गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता पार कर ली है। इसके साथ ही डिजिटल भुगतान में भारत दुनिया का नेतृत्व कर रहा है, प्रशासनिक स्तर पर जनगणना में डिजिटल तकनीक अपनाई जा रही है और परिवहन में हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत हो चुकी है। हालिया एशियाई खेलों में मिले 85 पदकों, तीरंदाजी, मुक्केबाजी और सेपक टकरॉ में पहली बार पुरुष क्वाड्रेंट स्पर्धा में मिली ऐतिहासिक जीत को उन्होंने दृढ़ संकल्प और व्यवस्थागत सुधारों का परिणाम बताया।
जनसांख्यिकीय लाभ और जन-कल्याणकारी नीतियों की उपलब्धियां बताते हुए प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि मध्यम वर्ग के लिए 12 लाख रुपये तक की आय करमुक्त की गई है, जिससे जीवन सुगम हुआ है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में 3.5 करोड़ लखपति दीदियां तैयार हो चुकी हैं और अगला लक्ष्य 6 करोड़ का है। विकसित भारत रोजगार योजना के अंतर्गत 70 लाख नए अवसर बने हैं। व्यापारिक क्षेत्र में सितंबर में वस्तुओं के निर्यात में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि 12 वर्षों में समुद्री उत्पादों का निर्यात दोगुने से अधिक हो चुका है।
अंत में प्रधानमंत्री ने भारत के तकनीकी रूपांतरण का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि देश में विश्व के 50 प्रतिशत से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर मौजूद हैं, जो एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और उत्पाद विकास के उच्चस्तरीय कार्य संभाल रहे हैं। दुनिया के 20 प्रतिशत चिप डिजाइनर भारत में हैं और युवा 2 से 3 नैनोमीटर चिप पर काम कर रहे हैं। वर्ष 2025 में करीब 1.5 लाख पेटेंट दाखिल होना और शोध में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर पहुंचना भारत के बौद्धिक नेतृत्व को दर्शाता है। फार्मा क्षेत्र में 5,000 करोड़ रुपये के निवेश और काकीनाडा में पेनिसिलिन-जी का उत्पादन फिर शुरू होने का हवाला देते हुए उन्होंने 140 करोड़ नागरिकों के सामर्थ्य के साथ विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने का आह्वान किया।



