हरदा बनेगा प्रदेश का पहला 100% सिंचित जिला; मुख्यमंत्री ने NVDA बैठक में समय पर काम पूरे करने के दिए सख्त निर्देश

भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्रालय में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) की 268वीं बैठक सहित विभिन्न बैठकों की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश में सिंचाई और जल संरक्षण की स्थिति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर है, क्योंकि हरदा जिला शत-प्रतिशत सिंचित जिला बनने की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।
शहीद ईलाप सिंह माइक्रो उद्वहन परियोजना करीब ₹756.76 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना से हरदा के 39,976 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई की स्थायी सुविधा मिलेगी, जिसमें तवा परियोजना के अंतिम छोर वाले किसान भी लाभान्वित होंगे। परियोजना का 42% से अधिक काम 16 महीनों में पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 1 करोड़ हेक्टेयर कृषि रकबे को सिंचित करना प्राथमिक लक्ष्य है।
निर्माणाधीन कार्यों की मॉनिटरिंग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रदेश की सभी सूक्ष्म, लघु, मध्यम और वृहद सिंचाई परियोजनाएं हर हाल में तय समय-सीमा में पूरी हों, और समय-सीमा में वृद्धि की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को केंद्र के जल शक्ति मंत्रालय से नियमित समन्वय करने और नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड की परियोजनाओं के लिए एशियन और इंटरनेशनल मौद्रिक संस्थाओं से उच्च समन्वय स्थापित करने को कहा।
सिंहस्थ 2028 और नदी लिंक
- सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन में शिप्रा नदी के घाटों और अन्य निर्माण कार्यों को दिसंबर 2027 तक पूरा करने की अनिवार्यता बताई गई।
- संयुक्त नदी-लिंक परियोजनाओं, जैसे कि ताप्ती मेगा रिचार्ज और चित्रकूट-मंदाकिनी परियोजना पर पड़ोसी राज्यों से सक्रिय समन्वय बनाने पर बल दिया गया।
- उज्जैन के बड़नगर क्षेत्र को सिंचाई के लिए पार्वती, कालीसिंध और चंबल राष्ट्रीय नदी लिंक परियोजना में शामिल करने का सुझाव दिया गया।
उपलब्धियाँ और भविष्य की योजनाएँ जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि पिछले 2 वर्षों में ₹6,640 करोड़ खर्च करके हरदा, बड़वानी और धार के जनजातीय अंचलों में लगभग 2 लाख हेक्टेयर में सिंचाई उपलब्ध कराई गई है, जिससे 600 गांवों के किसानों को लाभ मिला है।
अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि:
- स्लीमनाबाद टनल का निर्माण कार्य 31 जनवरी 2026 तक पूरा हो जाएगा।
- नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर, आईएसपी-कालीसिंध, और डही उद्वहन माईक्रो सिंचाई परियोजनाओं का काम 95% से अधिक पूरा हो चुका है।
- बड़नगर, नीमच और जावद सहित लगभग ₹12,000 करोड़ के परियोजना प्रस्ताव केंद्र को भेजे गए हैं, जिनकी डीपीआर स्वीकृति के बाद ये केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी लिंक परियोजना का हिस्सा बन सकते हैं।



