MP में हरित ऊर्जा का दबदबा: उत्पादन में 19 गुना वृद्धि, 2030 तक 20 गीगावॉट का लक्ष्य

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश के लिए 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा का जो लक्ष्य रखा है, उसमें मध्य प्रदेश 12 वर्षों में 19 गुना उत्पादन बढ़ाकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में राज्य की कुल क्षमता (31,000 मेगावॉट) में 30% से अधिक हरित ऊर्जा का योगदान है।
| परियोजना/क्षेत्र | क्षमता | मुख्य उपलब्धि |
| नीमच जिला | 500 मेगावॉट | सौर ऊर्जा उत्पादन हब, आगर (330 मेगावॉट) भी शामिल। |
| भगवानपुरा इकाई | 151 मेगावॉट | प्रतिवर्ष 2.16 लाख टन कार्बन उत्सर्जन की कटौती। |
| ओंकारेश्वर | 278 मेगावॉट | देश का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट। |
| मुरैना | पहली बार | देश की पहली ‘सोलर प्लस बैटरी स्टोरेज’ परियोजना (24 घंटे आपूर्ति)। |
| रीवा अल्ट्रा | 2,750 मेगावॉट (कुल 5 प्रमुख) | दिल्ली मेट्रो को बिजली आपूर्ति करने वाला सफल मॉडल। |
भविष्य के लक्ष्य और नीतियाँ:
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लक्ष्य 2030: हरित ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 20 गीगावॉट तक बढ़ाना।
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पॉलिसी नवाचार: MP देश का पहला राज्य है जिसने ‘टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक’ अक्षय ऊर्जा नीति लागू की है, जो सौर और पवन ऊर्जा के लिए निवेशकों को आकर्षित कर रही है।
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किसानों के लिए: कुसुम-सी योजना में 18,000 मेगावॉट के लिए निविदाएँ मिली हैं; 100% फीडर सोलरीकरण का प्रयास जारी है।
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भविष्य की ऊर्जा: पंप-हाइड्रो परियोजनाओं के लिए 14,850 मेगावॉट और बायोफ्यूल के लिए 6,500 टन प्रतिदिन क्षमता प्रस्तावित।
राज्य सरकार ‘सूर्य मित्र योजना’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों युवाओं को सौर ऊर्जा क्षेत्र में कौशल प्रशिक्षण और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी प्रदान कर रही है।



