भारत-EU के बीच ऐतिहासिक ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’: 18 साल का इंतजार खत्म, कारों और शराब पर घटेगा टैक्स

भारत-EU व्यापारिक युग की शुरुआत: 110% से घटकर 10% होगी लग्जरी कारों पर ड्यूटी, 2027 से लागू होगा समझौता
भारत और यूरोपीय संघ, जो मिलकर वैश्विक जीडीपी का 25% हिस्सा संभालते हैं, अब एक साझा व्यापारिक पटरी पर होंगे। पीटीआई के अनुसार, इस समझौते के पूरी तरह लागू होने के बाद भारतीय बाजारों में यूरोपीय उत्पादों की बाढ़ आ सकती है और कीमतें काफी कम हो सकती हैं।
प्रमुख बदलाव और फायदे:
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ऑटोमोबाइल सेक्टर: बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज जैसी लग्जरी कारों पर लगने वाला आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) 110% से सीधे गिरकर 10% पर आ जाएगा। सरकार ने इसके लिए सालाना 2.5 लाख गाड़ियों की सीमा तय की है।
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शराब और वाइन: यूरोपीय शराब पर मौजूदा 150% टैरिफ को घटाकर 20-30% करने का प्रस्ताव है, जिससे विदेशी वाइन सस्ती होगी।
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निर्यात में उछाल: यह डील भारत के 99% निर्यात और यूरोपीय संघ के 97% निर्यात को कवर करेगी। भारत के कपड़ा, रत्न-आभूषण, ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग सामान को यूरोपीय बाजार में सीधी और आसान पहुंच मिलेगी।
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कृषि और सेवा क्षेत्र: फल, सब्जी और समुद्री उत्पादों के निर्यात से किसानों और मछुआरों को लाभ होगा, वहीं आईटी और शिक्षा क्षेत्र के लिए नए रास्ते खुलेंगे।
FTA का आम जनता और कारोबारियों पर असर: कपड़ा, IT और कृषि क्षेत्र के लिए खुलेंगे सुनहरे अवसर
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस समझौते को भारत के 1.4 अरब लोगों के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। यह पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत का 8वां बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है।
किसे क्या मिलेगा?
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लेबर-बेस्ड इंडस्ट्री: कपड़ा, जेम्स एंड ज्वेलरी, और ऑटो पार्ट्स को यूरोपीय बाजार में सीधी और आसान पहुंच मिलेगी।
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किसानों को लाभ: फल, सब्जियां, प्रोसेस्ड फूड और समुद्री उत्पादों के निर्यात के लिए नए रास्ते खुलेंगे।
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सर्विस सेक्टर: आईटी (IT), शिक्षा और पारंपरिक चिकित्सा (आयुर्वेद आदि) क्षेत्र के पेशेवरों के लिए यूरोप में काम करना आसान होगा।
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यूरोपीय निवेश: उर्सुला वान डेर लेयेन के अनुसार, इस डील से सालाना करीब 43,500 करोड़ रुपये (4 अरब यूरो) के टैरिफ की बचत होगी, जिससे दोनों क्षेत्रों में लाखों नौकरियां पैदा होंगी।
पीएम मोदी का बड़ा बयान: “खनिजों और तकनीक को हथियार बनाने वालों के खिलाफ भारत-EU एकजुट, सप्लाई चेन को बनाएंगे सुरक्षित”
भारत-EU बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को केवल व्यापार तक सीमित न रखते हुए इसे एक रणनीतिक सुरक्षा कवच के रूप में पेश किया।
प्रधानमंत्री के संबोधन के मुख्य बिंदु:
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संसाधनों का हथियार बनाना: पीएम ने आगाह किया कि आज दुनिया में व्यापार, तकनीक और ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ (दुर्लभ खनिजों) को दबाव बनाने के लिए हथियार बनाया जा रहा है। भारत और EU मिलकर इस निर्भरता को खत्म करेंगे।
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साझा विनिर्माण: दोनों पक्ष इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, चिप्स और दवाओं के कच्चे माल (API) के लिए भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाने पर सहमत हुए हैं।
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भविष्य की तकनीक: रक्षा, अंतरिक्ष (Space), टेलीकॉम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में साझेदारी बढ़ाने की अपील की गई है।
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टिकाऊ भविष्य: ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा और स्मार्ट ग्रिड जैसे क्षेत्रों में रिसर्च और निवेश को प्राथमिकता दी जाएगी।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस समझौते को भारत के 1.4 अरब लोगों के लिए गौरव का क्षण बताया। वहीं यूरोपीय नेताओं ने भारत के साथ इस जुड़ाव को वैश्विक स्थिरता के लिए जरूरी बताया।
नेताओं के महत्वपूर्ण बयान:
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पीयूष गोयल: “यह मोदी सरकार का 8वां बड़ा FTA है। पिछले 4 साल में हमने 37 विकसित देशों के साथ समझौते किए हैं, जो भारत की बढ़ती ताकत का प्रमाण है।”
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काजा कालास (यूरोपीय उपाध्यक्ष): उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोप समझौते में समय जरूर लेता है, लेकिन वह अपने वादों पर अडिग रहता है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी सहयोग की बात कही।
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उर्सुला वान डेर लेयेन: उन्होंने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार देते हुए कहा कि इससे हर साल करीब 43.5 हजार करोड़ रुपए (4 अरब यूरो) के टैरिफ कम होंगे।
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निवेश का आंकड़ा: पीएम मोदी ने बताया कि पिछले 10 साल में व्यापार दोगुना होकर 180 अरब यूरो हो गया है। भारत में 6,000 यूरोपीय कंपनियां सक्रिय हैं, जबकि 1,500 भारतीय कंपनियां यूरोप में व्यापार कर रही हैं।
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