“व्यवधान नहीं, समाधान का समय”: बजट सत्र 2026 के प्रारंभ में पीएम मोदी का सांसदों को संदेश

नई दिल्ली: संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास जताया कि भारत आज विश्व के लिए आशा की किरण और आकर्षण का केंद्र है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान सरकार ‘सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन’ (Reform, Perform, Transform) के सिद्धांत पर अडिग है।
रणनीतिक विश्लेषण: प्रधानमंत्री ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को एक ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं की आकांक्षाओं के लिए एक खुला आसमान है। उन्होंने उद्योग जगत को आगाह किया कि यूरोपीय संघ के 27 देशों के बाजार में पैठ बनाने के लिए ‘शून्य दोष’ (Zero Defect) वाली गुणवत्ता अनिवार्य है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश अब लंबित समस्याओं के बजाय समाधानों के युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने संसद के सभी सदस्यों से आह्वान किया कि यह समय व्यवधान का नहीं, बल्कि सार्थक समाधानों और मजबूत निर्णयों का है ताकि अंतिम छोर तक योजनाओं की डिलीवरी सुनिश्चित की जा सके।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बजट सत्र 2026 की शुरुआत में एक विजनरी संदेश देते हुए देश की लोकतांत्रिक शक्ति और जनसांख्यिकीय लाभ पर प्रकाश डाला।
भाषण की बड़ी बातें:
-
ऐतिहासिक बजट: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार 9वीं बार बजट पेश कर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं।
-
वैश्विक अवसर: भारत-यूरोपीय संघ समझौता भारतीय उत्पादकों के लिए कम लागत पर बड़ा बाजार उपलब्ध कराएगा।
-
नेक्स्ट जनरेशन रिफॉर्म्स: प्रधानमंत्री ने ‘अगली पीढ़ी के सुधारों’ की निरंतरता का वादा किया, जो कागजों तक सीमित न रहकर सीधे लोगों के जीवन को प्रभावित करेंगे।
-
सांसदों से अपील: पीएम ने सभी सांसदों से सहयोग का आग्रह करते हुए कहा कि लोकतंत्र के इस मंदिर से विश्व को शांति और सशक्त निर्णयों का संदेश जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि भारत की तकनीक और लोकतंत्र मिलकर दुनिया को नई दिशा देंगे, जहाँ विकास के केंद्र में हमेशा ‘मानव’ रहेगा।



