‘कवच’ और आधुनिक तकनीक से सुरक्षित हुआ भारतीय रेल का सफर, दुर्घटनाएं हुई न्यूनतम

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि तकनीकी उन्नयन और बुनियादी ढांचे में निवेश ने भारतीय रेल को सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि मानवीय त्रुटियों को कम करने के लिए रेलवे अब आधुनिक सिग्नलिंग और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों पर निर्भर है।
लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रेलवे में गंभीर दुर्घटनाओं के ग्राफ में लगभग 90 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सदन को बताया कि रेलवे के सुरक्षा बजट में तीन गुना से अधिक की वृद्धि की गई है, जिसका सीधा असर पटरियों पर सुरक्षा के रूप में दिख रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2004 से 2014 के बीच रेल दुर्घटनाओं में जहां 3,155 लोग घायल हुए थे, वहीं 2014 से 2024 के बीच यह संख्या गिरकर 2,087 रह गई है। मंत्री ने ट्रैक के बेहतर रखरखाव और आधुनिक सिग्नलिंग को इस सुधार का श्रेय दिया। सरकार ने भविष्य के लिए भी कड़े सुरक्षा मानक तय किए हैं, जिसके लिए 2026-27 के लिए 1.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित किया गया है। वैष्णव ने विश्वास जताया कि निरंतर तकनीकी निवेश से भारतीय रेल का परिचालन और अधिक सुरक्षित होगा।
मुख्य सुरक्षा पहल:
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ट्रैक सर्किटिंग: 6,669 स्टेशनों पर बिजली के माध्यम से ट्रेनों की उपस्थिति जांचने की व्यवस्था।
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इंटरलॉकिंग: 10,153 लेवल क्रॉसिंग गेटों को इंटरलॉक किया गया।
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कवच सिस्टम: दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त रूटों पर नवीनतम ‘कवच’ एटीपी तैनात।
आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में 31 दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, जबकि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक केवल 14 घटनाएं हुई हैं। मंत्री ने जोर दिया कि सुरक्षा रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।



