कलपक्कम में परमाणु परियोजना को मिली बड़ी सफलता, भारत रूस के बाद दूसरा देश बनने की ओर

तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित 500 मेगावॉट ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ परियोजना ने एक और मील का पत्थर पार कर लिया है। सोमवार रात इसका दूसरा चरण पूरा हो गया, जिसके बाद अब यह परियोजना अपने अंतिम चरण के करीब पहुंच गई है।
इस प्रोजेक्ट में 80% से अधिक स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है, जो भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। फिलहाल दुनिया में केवल रूस के पास ही फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है, और भारत इसके पूरा होने पर इस सूची में शामिल हो सकता है।
रिएक्टर का डिजाइन इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र ने तैयार किया है। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर पोस्ट करते हुए इसे देश की परमाणु यात्रा में बड़ी उपलब्धि बताया।
यह परियोजना 2003 में शुरू की गई थी और इसमें 200 से ज्यादा भारतीय कंपनियों ने भाग लिया। इस रिएक्टर में यूरेनियम और प्लूटोनियम के मिश्रण यानी MOX ईंधन का उपयोग किया जाता है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह जितना ईंधन खर्च करता है, उससे अधिक ईंधन उत्पन्न कर सकता है। यह भविष्य में भारत के लिए थोरियम आधारित ऊर्जा उत्पादन के रास्ते भी खोलता है।



