ग्रिड स्थिरता और दक्षता पर जोर: भारत-भूटान ने सीमा पार बिजली व्यापार के लिए तैयार किया तकनीकी ढांचा

भारत और भूटान के बीच हुए नए समझौतों का उद्देश्य न केवल बिजली खरीदना-बेचना है, बल्कि दोनों देशों के ग्रिड नेटवर्क को तकनीकी रूप से उन्नत बनाना भी है। ये समझौते तकनीकी बारीकियों और संस्थागत ढांचे के विस्तार पर केंद्रित हैं।
तकनीकी सुधार (रिएक्टिव पावर एक्सचेंज): समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘रिएक्टिव पावर एक्सचेंज’ के लिए तकनीकी ढांचा तैयार करना है। यह सीमा पार बिजली व्यापार में ग्रिड की स्थिरता (Grid Stability) को बनाए रखने और बिजली की बर्बादी रोकने में मदद करेगा। इससे ग्रिड की समग्र दक्षता में सुधार होगा, जिससे दोनों देशों के बिजली उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
संस्थागत ढांचा और क्षमता निर्माण: दोनों देशों ने सहयोग के दायरे को केवल जलविद्युत (Hydro) तक सीमित न रखते हुए इसे गैर-जलविद्युत ऊर्जा, सीमा पार ट्रांसमिशन लाइन और प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग तक फैला दिया है। इसके तहत एक उन्नत संस्थागत तंत्र बनाया गया है जो क्षमता निर्माण और तकनीकी समन्वय की निगरानी करेगा।



